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उत्तराखंड: मुख्य सचिव ने बिना सीट परीक्षा मामले की तलब की रिपोर्ट, श्रीदेव सुमन विवि ने बैठाई जांच 

Sat, 24 Jul 2021 02:18 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 24 Jul 2021 02:18 PM IST
सार

श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय ने उससे संबद्ध देहरादून और हरिद्वार जिले के प्राइवेट कालेजों के लिए बीए प्रथम वर्ष, बीएससी और बीकॉम प्रथम वर्ष की सीटें स्वीकृत की गई थी।

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Sri dev suman university: uttarakhand chief secretary reports summons without seat examination case
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

मुख्य सचिव डॉ. सुखबीर सिंह संधु ने श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय से संबद्ध प्राइवेट कालेजों में तय सीमा से अधिक सीटों पर परीक्षा कराने के मामले की रिपोर्ट तलब की है। प्रभारी सचिव उच्च शिक्षा दीपेंद्र चौधरी के मुताबिक विश्वविद्यालय की ओर से शासन को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी गई है। जिसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय की ओर से प्रकरण में आंतरिक जांच बैठा दी गई है।  

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श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय ने उससे संबद्ध देहरादून और हरिद्वार जिले के प्राइवेट कालेजों के लिए बीए प्रथम वर्ष, बीएससी और बीकॉम प्रथम वर्ष की सीटें स्वीकृत की गई थी। नियमानुसार तय सीटों पर ही छात्र-छात्राओं के एडमिशन होने थे।

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आरोप है कि इन कालेजों एवं विश्वविद्यालय के कुछ लोगों की मिलीभगत से निजी महाविद्यालयों में न सिर्फ तय से अधिक सीटों पर एडमिशन कर दिए गए बल्कि पिछले साल अगस्त से सितंबर तक इन छात्र-छात्राओं की परीक्षा भी करा दी गई। मामला विश्वविद्यालय के संज्ञान में आने पर विश्वविद्यालय की ओर से अब इन छात्र-छात्राओं का रिजल्ट रोक दिया गया है। 

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प्रभारी सचिव उच्च शिक्षा दीपेंद्र कुमार चौधरी के मुताबिक मुख्य सचिव ने पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है। विश्वविद्यालय से पूछा गया कि कितने छात्रों का रिजल्ट रोका गया है। इस पर विश्वविद्यालय की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। विश्वविद्यालय की ओर से जो रिपोर्ट सौंपी गई है उसमें बताया गया है कि 14 कालेजों को नोटिस दिया गया है। प्रकरण की आंतरिक जांच बैठका दी गई है। जांच रिपोर्ट आने पर कार्यकारी परिषद, शासन व कुलाधिपति को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।


 

 

विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एक कालेज के छात्रों को परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया। इस पर कालेज इसके खिलाफ हाईकोर्ट गया हुआ है। प्रभारी सचिव ने कहा कि विश्वविद्यालय का भी दायित्व है कि कितने छात्र-छात्राओं ने परीक्षा फार्म भरे और कितनों ने परीक्षा दी। विश्वविद्यालय को समय रहते रह देेखना चाहिए था।  

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