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इस राज्य में भ्रष्ट अफसरों पर निगाह रखेंगे ‘मुखबिर’
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 07 Oct 2015 11:57 AM IST
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उत्तराखंड के ऊर्जा निगम में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कर्मचारी अब मुखबिरी भी कर सकेंगे। प्रदेश भर के निगम कर्मचारी भ्रष्टाचार की शिकायत सक्षम अथारिटी के सामने रख पाएंगे। प्रबंधन ने कंपनी अधिनियम के तहत ऊर्जा निगम में व्हिसल ब्लोवर पालिसी लागू कर दी है।
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व्हिसल ब्लोवर (मुखबिर या खुलासा करने वाला) पॉलिसी के तहत कर्मचारी निगम के किसी भी अधिकारी के अनैतिक व्यवहार, फर्जीवाड़े, निगम के नीतिगत नियमों का उल्लंघन करने की शिकायत सक्षम अथारिटी से कर सकता है। पॉलिसी के मुताबिक, सक्षम अथॉरिटी से आशय निगम के प्रबंध निदेशक या उनके द्वारा नामित निदेशक की मानीटरिंग में बनी कमेटी से है।
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कर्मचारी को अगर किसी भी प्रोजेक्ट निर्माण की घटिया गुणवत्ता, वित्तीय अनियमितता या टेंडर की हेराफेरी का पता लगता है, तो वह इसकी तह में जाकर सबूत एकत्र कर सकता है। सबूत के साथ वह कर्मचारी एक निश्चित फार्मेट पर शिकायत और अन्य जरूरी सूचनाएं भरकर सक्षम अथारिटी को देगा।
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जिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत है, शिकायतकर्ता को दस रुपए के शपथ पत्र में उसका नाम, पद, पोस्टिंग की जगह, अनुभाग का नाम और शिकायत का विवरण फार्मेट में हिंदी या अंग्रेजी में दर्ज करना होगा। नीति के तहत शिकायतकर्ता का नाम पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा।
अगर कर्मचारी को कोई संदेह हो तो वह शिकायत सीधे ऑडिट कमेटी के चेयरमैन से कर सकता है। कमेटी द्वारा शिकायत की जांच करायी जाएगी। शिकायत सही पाए जाने पर आरोपी अफसर पर कार्रवाई होगी। अगर जांच में यह पाया गया कि पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर झूठी शिकायत की गई है तो आरोपी कर्मचारी के विरुद्घ भी कार्रवाई की जाएगी।
ऊर्जा निगम के प्रवक्ता मधुसूदन ने बताया कि निगम में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कंपनी अधिनियम-2013 के तहत यह नीति लागू कर दी गई है।