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बिना होमवर्क के रणजी मैच में मंत्री जी फिर फेल
अभिषेक सिंह / अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Fri, 20 Oct 2017 12:44 PM IST
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arvind pandey
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राष्ट्रीय खेल की तरह रणजी मैच भी उत्तराखंड के हाथ से फिसल गया, इसके पीछे मुख्यत: खेल मंत्री अरविंद पांडे का आधा-अधूरा होमवर्क जिम्मेदार है। सबसे पहले तो उन्होंने मैच को लेकर प्रदेश में कार्यरत सभी क्रिकेट एसोसिएशन को भरोसे में नहीं लिया और दूसरा मैदान की स्थिति भी अपने स्तर से जानने की कोशिश नहीं की।
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हालांकि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मान्यता को लेकर हुई बैठक में रणजी मैच के सफलतापूर्वक आयोजन के लिए समन्वय कमेटी बनने से लगा कि बिगड़ी बात बन जाएगी, लेकिन खेल मंत्री से फिर यहां चूक हुई कि कमेटी को अधिकार हीं नहीं सौंपे गए। इससे बनता हुआ खेल भी बिगड़ गया।
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इसके अलावा मैच की समाप्ति पर पुरस्कार वितरण के बाद एक एसोसिएशन को उपकृत करने को लेकर उड़ी अफवाह ने भी खेल खराब कर दिया। उधर यूपीसीए और बोर्ड के पदाधिकारी मैच भले ही मैच को लेकर अधिकारिक बयान देने से बच रहे लेकिन लखनऊ के एकाना स्टेडियम में हो रही तैयारियां इस ओर इशारा कर रही है कि 24 अक्तूबर को यूपी और महाराष्ट्र के बीच मैच वहीं होगा।
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28 तारीख को लखनऊ के दिलीप ट्रॉफी फाइनल मैच के दौरान खेल मंत्री अरविंद पांडे ने उत्तरप्रदेश के खेल मंत्री चेतन चौहान के साथ आईपीएल कमिश्नर व यूपीसीए के डायरेक्टर राजीव शुक्ला से मुलाकात करके मैच को देहरादून कराने की सिफारिश की। इस पर यूपीसीए ने हामी भर ली साथ ताकीद की कि मैच की तैयारियों में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
खेल मंत्री अरविंद पांडे ने इस मामले पर हामी भरी और देहरादून आकार समाचार पत्रों के माध्यम से इसका श्रेय भी खुद ही लिया। श्रेय लेना बनता भी था क्योंकि उन्होंने मैच के लिए अपने स्तर से काफी प्रयास भी किए। वहीं बोर्ड की वेबसाइट में यूपी और महाराष्ट्र के बीच होने वाला रणजी मैच का आयोजन स्थल देहरादून दिखने लगा। इधर मैच मिलने के बाद देहरादून में घटनाक्रम तेजी से बदला और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड में युनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन का विलय भी हो गया, जो कि प्रदेश के क्रिकेट के हित में अच्छा संकेत था।
पर खेल मंत्री के स्तर से यहीं एक बड़ी चूक यह हो गई कि उन्हें समय रहते चारों एसोसिएशन को बुलाना चाहिए था और एक कमेटी बनाकर उन्हें मैच कराने की जिम्मेदारी सौंप देनी चाहिए थी। हालांकि खेल मंत्री ने 16 अक्तूबर को यह कदम उठाया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तब तक देहरादून से लेकर मुंबई तक एक खबर फैल गई कि मैच समाप्ति के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में यूपीसीए और बीसीसीआई के अधिकारियों की मौजूदगी में एक एसोसिएशन को मैच कराने का श्रेय दे दिया जाएगा, ताकि बोर्ड की मान्यता मिलने में उसकी राह आसान हो सके।
बस इसी खबर ने विरोधियों के कान खड़े कर दिए और एक के बाद एक करके कई मेल बोर्ड को भेजे गए, जिसमें मैच देहरादून में कराने से लेकर स्टेडियम तक पर सवाल उठा दिए गए। सूत्रों के हवाले से तो यह भी पता चला है कि इसके लिए बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष तक से मैच रद्द कराने की पैरवी कराई गई। बोर्ड ने भी किसी पचड़े में फंसने के बजाय यूपीसीए को कटघरे में खड़ा करते हुए देहरादून में मैच को लेकर सवाल उठा दिए। उसी दिन बीसीसीआई की वेबसाइट भी अपडेट करके मैच सेंटर लखनऊ कर दिया गया।
मामला बिगड़ने की खबर के बीच सीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में आनन-फानन में मैच कराने को लेकर समन्वय कमेटी बना दी गई। पर यहां दूसरी चूक खेल मंत्री से यह हुई कि इस कमेटी को मैच कराने की जिम्मेदारी तो सौँप दी, लेकिन उन्हें क्या-क्या अधिकार होंगे यह नहीं बताया गया। उस समय भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी होती तो बिगड़ा हुआ मामला बन सकता था। इस बारे में खेल मंत्री से बात करने की कोशिश की गई तो उनके पीए ने बताया कि मंत्री जी अभी व्यस्त हैं, आते ही बात करा दी जाएगी। खबर फाइल करने तक उनका फोन नहीं आया, जैसे ही उनसे बात होगी उनका पक्ष भी जस का तस प्रकाशित किया जाएगा।
मैच के खिलाफ बोर्ड को भेजे गए ईमेल का सार
1- समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर के मुताबिक 24 अक्तूबर को उत्तर प्रदेश और महराष्ट्र के बीच देहरादून में मैच होना है। मैच की स्थिति के बारे में क्या आप बताएंगे?
2- इस मैच को कौन सा राज्य करा रहा है?
3- क्या बिना बीसीसीआई से मान्यता प्राप्त राज्य जैसे उत्तराखंड में रणजी मैच हो सकता है?
4- क्या उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन जिसे यह मैच बोर्ड ने दिया है वह इस मैच को बिना मान्यता प्राप्त राज्य को स्थानांतरित कर सकता है?