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शास्त्रीजी ने यहां बनाया था अंग्रेजों से बचने का ठिकाना

Fri, 02 Oct 2015 01:30 PM IST
सतीश जोशी ‘सत्तू’/ अमर उजाला, चंपावत
सतीश जोशी ‘सत्तू’/ अमर उजाला, चंपावत Updated Fri, 02 Oct 2015 01:30 PM IST
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special story on lal bahadur shashtri.

उत्तराखंड के चंपावत जिले का खेतीखान क्षेत्र भले ही आज भी एक ग्रामीण इलाका है, पर यह पहचान का मोहताज कतई नहीं है। इस क्षेत्र का आजादी की लड़ाई में खासा योगदान था।

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यहां जागोली की धर्मशाला जंग-ए-आजादी की लड़ाई की प्रमुख गवाह रही है। देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी इस धर्मशाला में वर्ष 1934 में एक हफ्ते तक रुके थे। आजादी की लड़ाई के दौरान जागोली धर्मशाला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के छिपने का महफूज ठिकाना बनी थी। शास्त्री सहित कई नामचीन शख्सियतों ने इस धर्मशाला में प्रवास किया था।
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इतिहासकार देवेंद्र ओली के अनुसार खेतीखान के ओलीगांव में स्वतंत्रता सेनानी दिवंगत हर्षदेव ओली के मकान के पास जागोली मंदिर परिसर की धर्मशाला गुलामी की बेड़ियों को काटने का हथियार बनी थी। उस दौर में यह धर्मशाला अंग्रेजों के खिलाफ चलने वाली तमाम गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में रही।
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वर्ष 1920 में बनी यह धर्मशाला वीरान जगह पर होने से अंग्रेजों के निशाने पर भी कम रहती थी। गोरों के आतंक से बचने और रणनीति बनाने के लिए ये स्थान बेहद सुरक्षित था।

प्रतिवर्ष लगाया जाता है खीर का भंडारा

special story on lal bahadur shashtri.

वर्ष 1932 में हुए तीसरे गोलमेज सम्मेलन के दो वर्ष बाद कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में लाल बहादुर शास्त्री यहां आए। जागोली धर्मशाला उनकी गुफ्तगू का सबसे महफूज स्थान हुआ करता था। वह एक सप्ताह यहां रुके तथा आजादी की लड़ाई की कई महत्वपूर्ण योजनाओं को क्रियान्वित करने का तरीका खोजा।

सेनानी हर्षदेव ओली के प्रपौत्र राजेश ओली बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने भी यहां डेरा डाल ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ रणनीति तैयार की थी।

इसके अलावा विख्यात बैरिस्ट और अंग्रेजी अखबार इंडिपेंडेट के संपादक श्रीयुत रंगायर भी अपने बेटे के साथ यहां छह माह तक रुके। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान क्रांतिकारी मदनमोहन उपाध्याय, हरगोविंद पंत, कुमाऊं केसरी बद्री दत्त पांडेय जैसे दिग्गजों ने भी यहां कई-कई बार बसेरा बना आजादी की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाया था।

भले ही पूरे देश में दो अक्तूबर को गांधी जयंती के रूप में ही ज्यादा तवज्जो दी जाती रही हो, लेकिन खेतीखान क्षेत्र में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन भी खास तरीके से मनाया जाता है। जागोली जागृति स्थली के नाम से प्रसिद्ध धर्मशाला में प्रतिवर्ष शास्त्री जी की याद में दो अक्तूबर को खीर का भंडारा लगाया जाता है, जिसमें आसपास के गांवों के लोग सहभागिता करते हैं।

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