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क्या इसीलिए मां को ऋषिकेश लाया था कलयुगी बेटा?

Sat, 19 Apr 2014 12:03 AM IST
अमर उजाला, ऋषिकेश
अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Sat, 19 Apr 2014 12:03 AM IST
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son left his mother

मां तुम यहां बैठो, गंगा दर्शन करो मैं अभी आता हूं...। और बेटा चला गया। घंटे-दो घंटे...पूरी रात गुजर गई, लेकिन बेटा नहीं आया।

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अगली सुबह त्रिवेणी घाट पर अकेली बैठी वृद्धा पर लोगों की नजर पड़ी तो पूछताछ शुरू हुई। पता चला बेटा छोड़कर भाग गया है।

लोगों ने कोसना शुरू किया तो बहते आंसुओं को रोकते हुए वृद्धा बोल पड़ी, उसे कुछ न कहो। मेरे ही कर्म खराब होंगे, जो मेरे साथ ऐसा हुआ।

पंजाब की रहने वाली है वृद्धा

यह कहानी है बदनसीब 85 वर्षीय आशा रानी पत्नी स्व. सीताराम निवासी ग्राम फाजलपुर जालंधर, पंजाब की। जिसे उसका बेटा मोहनलाल 16 अप्रैल को घूमाने के बहाने तीर्थनगरी लेकर पहुंचा था।


यहां उसने आसपास मठ मंदिरों के दर्शन भी कराए। शाम के समय मां को लेकर त्रिवेणीघाट पर गंगा स्नान की बात कहकर लाया था।

बकौल वृद्धा, घाट पर कपड़ों से भरा बैग थमाते हुए बोला, तुम यहीं बैठो मैं अभी आता हूं। इसके बाद बेटा वापस नहीं लौटा।

तबियत खराब होने पर लोगों का गया ध्यान
वृद्धा ने भगवान भरोसे खुले आसमान के नीचे रात गुजारी। सुबह तबियत बिगड़ते देख कुछ लोगों ने 108 सेवा की मदद से सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में ट्रामा सेंटर के वार्ड में भर्ती वृद्धा पथराई आंखों से बेटे की राह देख रही है।
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जब उनसे बेटे की करतूत के बारे में पूछा तो वह लड़खड़ाती आवाज में बोली, उसे कुछ नहीं कहो। मेरे करम ही ऐसे होंगे।

उधर, पुलिस ने बताया कि मामला संज्ञान में है। वृद्धा ने घर का जो पता बताया है, उसे ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है।

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