आफत की बर्फबारी: कई जगह रास्ते हुए बंद, बर्फ से ढके 124 गांव, स्कूलों में सात दिन की छुट्टी
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उत्तराखंड में बर्फबारी ने लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। थल-मुनस्यारी सड़क 11वें दिन भी यातायात के लिए नहीं खुल पाई। सड़क बंद होने से क्षेत्र में लोगों को फल, सब्जियों के लिए भी तरसना पड़ रहा है। यदि एक-दो दिन सड़क और बंद रही तो खाद्यान संकट गहरा सकता है। सड़क नहीं खुलने से लोगों में आक्रोश पनप रहा है। सड़क के करीब सात किलोमीटर हिस्से में भारी मात्रा में बर्फ जमा होने के कारण मुनस्यारी विकासखंड के समकोट का शेष दुनिया से संपर्क कट गया है। समकोट में जरूरी सामान की किल्लत होने लगी है।
एक सप्ताह से लगातार हो रही बर्फबारी से समकोट की क्षेत्र की तीन हजार आबादी के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। गिनी बैंड से समकोट के लिए बनी 16 किमी सड़क पर गिनी बैंड से मल्ला समकोट तक सात किमी हिस्से में बर्फ पटी हुई है। सड़क में बर्फ होने से वाहनों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। लोगों को इस बर्फ से होकर सात किमी पैदल नापने पड़ रहे हैं।
थल-मुनस्यारी सड़क 21 जनवरी से बंद है। मौसम में सुधार होने के बाद लोनिवि ने मुनस्यारी और रातपानी से सड़क खोलने का कार्य शुरू किया। सड़क पर से बर्फ हटाने के लिए चार जेसीबी और दो स्नोकटर लगाए गए हैं। लोनिवि के जेई हरीश राम ने बताया कि बृहस्पतिवार को रातापानी से कालामुनि के बीच 17 किमी तक बर्फ हटाई गई। मुनस्यारी की ओर से आठ किमी कुल 25 किमी सड़क खोल दी गई है।
बलांती और बेटुलीधार के बीच पांच किमी सड़क और खोली जानी है। ऊपरी क्षेत्र में फिर से बर्फबारी होने से कार्य में बाधा आ गई। शुक्रवार को मौसम साफ रहने पर सड़क से बर्फ हटाने का कार्य फिर से शुरू किया जाएगा। कांग्रेस नेता मनोहर टोलिया का कहना है कि लोनिवि बेहद धीमी गति से कार्य कर रही है। इससे सड़क खुलने में विलंब हो रहा है। साथ ही क्षेत्र में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मुनस्यारी-जौलजीबी सड़क खुली होने से सब्जियां और अन्य सामान उसी मार्ग से पहुंच रहा है।
गंगोत्री-यमुनोत्री सहित संपर्क मार्ग अवरुद्ध
बुधवार देर शाम से ही जनपद के 2000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी व निचले क्षेत्रों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जिससे जिले के 100 से अधिक गांव बर्फ की आगोश में समाने के साथ ही यातायात आदि बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होने लगी हैं। आपदा प्रबंधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार यमुनोत्री हाईवे पर फूलचट्टी से जानकीचट्टी तक यातायात ठप पड़ गया है, जबकि हाल ही में सुचारु किए गए गंगोत्री हाईवे पर सोनगाड़ से आगे मार्ग जोखिम भरा होने के कारण यातायात अवरुद्ध है। वहीं कमद-अयांरखाल, नैटवाड़-सेवा, मोरी-सांकरी, पासा-पैंसर सहित आधा दर्जन संपर्क मार्ग भी बर्फबारी के कारण बंद हो गए हैं।
ऐसे में लगातार हो रही बर्फबारी को देखते हुए ऊंचाई वाले स्थानों पर मौजूद कई अन्य मोटर मार्गों के अवरुद्ध होने की आशंका बनी हुई है। हालांकि अभी तक विद्युत व दूरसंचार व्यवस्था सुचारु रहने से ग्रामीणों को कुछ राहत मिली है, जबकि बीआरओ, एनएच व लोनिवि के कर्मचारी भी लगातार अवरुद्ध मार्गों को सुचारु करने में जुटे हैं। डीएम डा. आशीष चौहान ने संबंधित विभागों को व्यवस्थाएं सुचारु रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही किसी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभावित लोगों तक जल्द सहायता मुहैया कराने के भी आदेश दिए।
7 फरवरी तक बंद रहेंगे स्कूल-आंगनबाड़ी केंद्र
जिले के शीतकालीन अवकाश वाले 124 विद्यालयों में अवकाश की अवधि बढ़ा दी गई है। शासन ने शीतकालीन अवकाश वाले आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में सात फरवरी तक छुट्टी घोषित कर दी है। स्कूलों और उन तक पहुंचने वाले रास्तेे बर्फ से ढके होने के कारण डीएम की मांग पर शासन ने यह निर्णय लिया है।
जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के चलते विद्यालयों में शीतकालीन अवकाश की व्यवस्था है। गंगा घाटी में उपला टकनौर, यमुनोत्री क्षेत्र, पुरोला ब्लाक के सरबडियार और मोरी ब्लाक के सुदूरवर्ती गांवों में 10 माध्यमिक, 22 जूनियर हाईस्कूल और 92 प्राथमिक विद्यालयों में 31 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश घोषित था। इन क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों में भी यही व्यवस्था थी।
एक फरवरी से इन विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों को खुलना था, लेकिन अब 7 फरवरी तक छुट्टी रहेगी। ऐसे स्कूलों में छात्रों के साथ ही शिक्षकों की भी छुट्टी रहेगी। यह अतिरिक्त अवकाश उनके ग्रीष्मकालीन अवकाश में समायोजित कर दिया जाएगा।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शिक्षा विभाग से शीतकालीन अवकाश वाले विद्यालयों की सूची मांगी थी। उन्होंने शासन से इन विद्यालयों में शीतकालीन अवकाश की अवधि सात दिन और बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। जिसपर शासन ने सात फरवरी तक शीतकालीन अवकाश बढ़ा दिया है।
- आरसी आर्य, मुख्य शिक्षा अधिकारी, उत्तरकाशी