खत्म हुआ तस्करी का ‘संसार’
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वन्य जीवों की तस्करी में कुख्यात संसार चंद दुनिया से विदा हो गया। मंगलवार को ब्रेन ट्यूमर से जयपुर के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
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संसार पर हरिद्वार में गुलदार खाल तस्करी के दो मामलों के अलावा पूरे देश में तस्करी के कई मामले दर्ज हैं।
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उत्तराखंड में उसकी पत्नी और भाई पर भी मुकदमे चल रहे हैं। करीब छह साल से संसार चंद राजस्थान की जेल में कैद था।
दो दर्जन से ज्यादा तस्करी के केस दर्ज
15 वर्षों के भीतर उत्तराखंड में तस्करी का नेटवर्क खड़ा करने वाले संसारचंद पर पूरे देश में दो दर्जन से ज्यादा वन्य जीव तस्करी के केस दर्ज हैं।
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राज्य में उसने विकासनगर, बड़ोवाला से हल्द्वानी तक तस्करी का नेटवर्क बिछा रखा था। अनुमान के मुताबिक उत्तराखंड में संसारचंद के लिए 100 से ज्यादा शिकारी काम करते थे।
1995 में पहली बार दर्ज हुआ था केस
1995 में हरिद्वार रेंज और हरिद्वार डिवीजन की श्यामपुर रेंज में गुलदार खाल की तस्करी के मामले में संसार पर दो केस दर्ज हुए।
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तब पहली बार तस्करी की दुनिया में संसारचंद का नाम सामने आया था। उसकी पत्नी रानी पर पौड़ी में गुलदार की खाल तस्करी का केस चल रहा है।
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भाई नारायण पर 2009 में रामनगर में बाघ की खाल तस्करी का केस चल रहा है। देहरादून के खुड़बुड़ा में संसार की ससुराल है।
चीन तक अंग और खाल की सप्लाई
1995 में केस दर्ज होने के बाद संसार ने हरिद्वार की सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया। उसी दिन उसे जमानत भी मिल गई।
वन विभाग की लचर पैरवी से यह मुकदमे आज तक ट्रायल पर हैं। बताया जाता है कि संसारचंद वन्य जीवों के अंगों की सप्लाई चीन करता था।
संसारचंद कुछ वर्षों से प्रदेश में ज्यादा एक्टिव नहीं था। वैसे वन्य जीवों की हत्या के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का जाना सुखद बात ही होगी।
- एसएस शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक