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चार साल में ग्रीन बिल्डिंग के लिए जमीन नहीं तलाश पाए स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारी
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जहां एक तरफ केंद्र सरकार की ओर से स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने और आमजन को अत्याधुनिक बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने को लेकर राज्य सरकारों व जिला प्रशासन पर भारी दबाव है, इसे स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों की लापरवाही कहें या कुछ और पिछले चार साल में स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारी 187 करोड़ की लागत से प्रस्तावित ग्रीन बिल्डिंग के लिए जमीन की तलाश तक नहीं कर पाए है। यह स्थिति तब है जबकि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत ग्रीन बिल्डिंग बनाने को लेकर ना सिर्फ डीपीआर तैयार कर लिया गया है वरन सीपीडब्ल्यूडी को निर्माण का ठेका भी दे दिया गया है।
बता दें कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत एक हजार करोड़ रुपये की लागत से राजधानी में तमाम निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहरियों को तमाम अत्याधुनिक बुनियादी सुविधाएं मुहैया करायी जानी है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 187 करोड रुपए की लागत से ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण किया जाना है। जिसमें कलेक्ट्रेट, विकास भवन, आपूर्ति विभाग समेत तमाम सरकारी विभागों के कार्यालयों को एक भवन में लाया जाना है। ग्रीन बिल्डिंग बनाने का उद्देश्य आमजन को एक ही छत के नीचे तमाम सरकारी सुविधाओं को मुहैया कराना है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण तो दूर स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारी ग्रीन बिल्डिंग के लिए जमीन की तलाश नहीं कर पाए हैं।
पहले ग्रीन बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव वर्तमान कलेक्ट्रेट में किया गया था । लेकिन कलेक्ट्रेट के अधिवक्ताओं ने इसका विरोध कर दिया। आखिरकार अब स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों व जिला प्रशासन की ओर से ग्रीन बिल्डिंग के लिए नए जगह पर जमीन की तलाश की जा रही है। स्मार्ट सिटी परियोजना के सीईओ जिला अधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार का कहना है कि ग्रीन बिल्डिंग के लिए जमीन को लेकर सचिव स्तर से वार्ता हो चुकी है। ट्रांसपोर्ट नगर में जमीन की तलाश की जा रही है। वर्तमान कलेक्ट्रेट परिसर में भी ग्रीन बिल्डिंग बनाने को लेकर तमाम विकल्प तलाशे जा रहे हैं। फिलहाल जैसे ही शासन स्तर पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाता है तो ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिया जाएगा। ग्रीन बिल्डिंग बनाए जाने को लेकर डीपीआर तैयार करने के साथ ही सीपीडब्ल्यूडी को टेंडर भी दिया जा चुका है। लेकिन इस बीच विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लागू होने की वजह से तमाम चीजों में देरी हो रही है। लेकिन जल्द ही ग्रीन बिल्डिंग के लिए जमीन तलाशने के साथ ही इसका निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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बता दें कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत एक हजार करोड़ रुपये की लागत से राजधानी में तमाम निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहरियों को तमाम अत्याधुनिक बुनियादी सुविधाएं मुहैया करायी जानी है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 187 करोड रुपए की लागत से ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण किया जाना है। जिसमें कलेक्ट्रेट, विकास भवन, आपूर्ति विभाग समेत तमाम सरकारी विभागों के कार्यालयों को एक भवन में लाया जाना है। ग्रीन बिल्डिंग बनाने का उद्देश्य आमजन को एक ही छत के नीचे तमाम सरकारी सुविधाओं को मुहैया कराना है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण तो दूर स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारी ग्रीन बिल्डिंग के लिए जमीन की तलाश नहीं कर पाए हैं।
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पहले ग्रीन बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव वर्तमान कलेक्ट्रेट में किया गया था । लेकिन कलेक्ट्रेट के अधिवक्ताओं ने इसका विरोध कर दिया। आखिरकार अब स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों व जिला प्रशासन की ओर से ग्रीन बिल्डिंग के लिए नए जगह पर जमीन की तलाश की जा रही है। स्मार्ट सिटी परियोजना के सीईओ जिला अधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार का कहना है कि ग्रीन बिल्डिंग के लिए जमीन को लेकर सचिव स्तर से वार्ता हो चुकी है। ट्रांसपोर्ट नगर में जमीन की तलाश की जा रही है। वर्तमान कलेक्ट्रेट परिसर में भी ग्रीन बिल्डिंग बनाने को लेकर तमाम विकल्प तलाशे जा रहे हैं। फिलहाल जैसे ही शासन स्तर पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाता है तो ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिया जाएगा। ग्रीन बिल्डिंग बनाए जाने को लेकर डीपीआर तैयार करने के साथ ही सीपीडब्ल्यूडी को टेंडर भी दिया जा चुका है। लेकिन इस बीच विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लागू होने की वजह से तमाम चीजों में देरी हो रही है। लेकिन जल्द ही ग्रीन बिल्डिंग के लिए जमीन तलाशने के साथ ही इसका निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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