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Dehradun News: रस्सी के फंदे से लटक रहा स्मार्ट सिटी का सी आई
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स्मार्ट सिटी के दावों के बीच देहरादून के परेड ग्राउंड की बदहाल तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। जगह-जगह कीचड़ फैला है, कहीं खुले तार हादसों को दावत दे रहे हैं। इन्हीं तारों के आसपास बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं। इतना ही नहीं परिसर में लगा स्मार्ट सिटी का नियोन साइन बोर्ड भी रस्सी के सहारे लटक रहा है।
सौंदर्यीकरण के नाम पर विकास की तस्वीर पेश करने वाले जिम्मेदारों के लिए ये हालात गंभीर सवाल हैं। परेड ग्राउंड में जगह-जगह फैला कीचड़ परिसर की बदहाली दिखा रहा है। वहीं खुले तारों के आसपास बच्चों का क्रिकेट खेलना सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है। बिजली के तार खुले हुए हैं जो हादसे का सबब बन सकते हैं।
सवाल यह है कि सार्वजनिक मैदान में तारों को सुरक्षित करने और बच्चों को संभावित खतरे से बचाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय समय रहते खतरे को दूर करना जरूरी है।
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परेड ग्राउंड में लगा स्मार्ट सिटी का नियोन साइन बोर्ड भी बदहाल व्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहा है। बोर्ड रस्सी के सहारे बंधा हुआ लटक रहा है। जिस परिसर में स्मार्ट सिटी की पहचान दिखाई जानी चाहिए, वहां साइन बोर्ड की ऐसी स्थिति रखरखाव पर सवाल उठा रही है। बोर्ड के तेज हवा या खराब मौसम में गिरने का खतरा भी बना हुआ है। संबंधित एजेंसी को इसकी मजबूती की जांच कराकर इसे सुरक्षित तरीके से लगाना चाहिए। संवाद
व्यवस्थाओं पर सवाल ही सवाल
परिसर में टूटी रेलिंग और अन्य अव्यवस्थाएं भी नजर आ रही हैं। कीचड़, खुले तार और लटकता साइन बोर्ड मिलकर परेड ग्राउंड के रखरखाव की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं। केवल सौंदर्यीकरण के दावे पर्याप्त नहीं है, सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा, साफ-सफाई और नियमित मरम्मत भी उतनी ही जरूरी है। परेड ग्राउंड शहर के लोगों के इस्तेमाल में आने वाला प्रमुख सार्वजनिक स्थल है। ऐसे में यहां की कमियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों को मौके का निरीक्षण कर खुले तारों की सुरक्षा, टूटी रेलिंग की मरम्मत, कीचड़ की सफाई और नियोन बोर्ड को सुरक्षित तरीके से लगाने की कार्रवाई करनी चाहिए।
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सौंदर्यीकरण के नाम पर विकास की तस्वीर पेश करने वाले जिम्मेदारों के लिए ये हालात गंभीर सवाल हैं। परेड ग्राउंड में जगह-जगह फैला कीचड़ परिसर की बदहाली दिखा रहा है। वहीं खुले तारों के आसपास बच्चों का क्रिकेट खेलना सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है। बिजली के तार खुले हुए हैं जो हादसे का सबब बन सकते हैं।
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सवाल यह है कि सार्वजनिक मैदान में तारों को सुरक्षित करने और बच्चों को संभावित खतरे से बचाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय समय रहते खतरे को दूर करना जरूरी है।
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परेड ग्राउंड में लगा स्मार्ट सिटी का नियोन साइन बोर्ड भी बदहाल व्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहा है। बोर्ड रस्सी के सहारे बंधा हुआ लटक रहा है। जिस परिसर में स्मार्ट सिटी की पहचान दिखाई जानी चाहिए, वहां साइन बोर्ड की ऐसी स्थिति रखरखाव पर सवाल उठा रही है। बोर्ड के तेज हवा या खराब मौसम में गिरने का खतरा भी बना हुआ है। संबंधित एजेंसी को इसकी मजबूती की जांच कराकर इसे सुरक्षित तरीके से लगाना चाहिए। संवाद
व्यवस्थाओं पर सवाल ही सवाल
परिसर में टूटी रेलिंग और अन्य अव्यवस्थाएं भी नजर आ रही हैं। कीचड़, खुले तार और लटकता साइन बोर्ड मिलकर परेड ग्राउंड के रखरखाव की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं। केवल सौंदर्यीकरण के दावे पर्याप्त नहीं है, सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा, साफ-सफाई और नियमित मरम्मत भी उतनी ही जरूरी है। परेड ग्राउंड शहर के लोगों के इस्तेमाल में आने वाला प्रमुख सार्वजनिक स्थल है। ऐसे में यहां की कमियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों को मौके का निरीक्षण कर खुले तारों की सुरक्षा, टूटी रेलिंग की मरम्मत, कीचड़ की सफाई और नियोन बोर्ड को सुरक्षित तरीके से लगाने की कार्रवाई करनी चाहिए।