{"_id":"61a7d5af545f743d7a2962c3","slug":"small-hospitals-should-be-given-exemption-in-clinical-establishment-act-ima-city-news-drn3976053113","type":"story","status":"publish","title_hn":"छोटे अस्पतालों को दी जाए क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में छूट: आईएमए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छोटे अस्पतालों को दी जाए क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में छूट: आईएमए
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने राज्य सरकार से मांग की है कि छोटे अस्पतालों को क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में छूट दी जाए। इस संबंध में आईएमए के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को मांगपत्र भेजा है।
आईएमए के प्रदेश सचिव डॉ. अजय खन्ना ने बुधवार को चकराता रोड स्थित आईएमए ब्लड बैैंक में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के नियमों के चलते छोटे अस्पताल संचालकों को काई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तीस बेड और उससे कम वाले अस्पतालों को एक्ट में छूट देने की मांग लंबे वक्त से की जा रही है। स्वास्थ्य महानिदेशालय व स्वास्थ्य सचिव के स्तर से उक्त प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल चुकी है। पर मामला न्याय विभाग में लंबित है। इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में यह व्यवस्था लागू है। डा. खन्ना ने कहा कि अस्थायी पंजीकरण के रूप में भी अस्पतालों पर अत्याधिक बोझ डाला जा रहा है। पंजीकरण अवधि समाप्त होने पर नवीनीकरण की बजाय पुन: पंजीकरण किया जा रहा है। जिसमें पूरा शुल्क देना होता है। जबकि एक्ट में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से बात की गई। जिन्होंने बताया कि इस मामले सरकार के स्तर से ही कार्रवाई हो सकती है। उन्होनें एक्ट के तहत अपराध को गैर जमानती बनाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजने की भी मांग की। इस दौरान आईएमए की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. डीडी चौधरी, जिलाध्यक्ष डॉ. अमित सिंह. आईएमए ब्लड बैंक के निदेशक डॉ. संजय उप्रेती आदि भी मौजूद थे।
विज्ञापन
आईएमए के प्रदेश सचिव डॉ. अजय खन्ना ने बुधवार को चकराता रोड स्थित आईएमए ब्लड बैैंक में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के नियमों के चलते छोटे अस्पताल संचालकों को काई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तीस बेड और उससे कम वाले अस्पतालों को एक्ट में छूट देने की मांग लंबे वक्त से की जा रही है। स्वास्थ्य महानिदेशालय व स्वास्थ्य सचिव के स्तर से उक्त प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल चुकी है। पर मामला न्याय विभाग में लंबित है। इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में यह व्यवस्था लागू है। डा. खन्ना ने कहा कि अस्थायी पंजीकरण के रूप में भी अस्पतालों पर अत्याधिक बोझ डाला जा रहा है। पंजीकरण अवधि समाप्त होने पर नवीनीकरण की बजाय पुन: पंजीकरण किया जा रहा है। जिसमें पूरा शुल्क देना होता है। जबकि एक्ट में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से बात की गई। जिन्होंने बताया कि इस मामले सरकार के स्तर से ही कार्रवाई हो सकती है। उन्होनें एक्ट के तहत अपराध को गैर जमानती बनाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजने की भी मांग की। इस दौरान आईएमए की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. डीडी चौधरी, जिलाध्यक्ष डॉ. अमित सिंह. आईएमए ब्लड बैंक के निदेशक डॉ. संजय उप्रेती आदि भी मौजूद थे।
विज्ञापन