सरहद पर 'कमजोर' है भारतीय सेना!
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रक्षा मामलों की संसदीय समिति की रिपोर्ट की माने तो भारतीय सेना संसाधनों की कमी से जूझ रही है। हाल यह है कि कई सैनिकों को बेहद जरूरी बेहतर राइफल, बुलेट प्रूफ जैकेट, अच्छे जूते और मच्छरदानी तक नहीं मिल पा रही हैं।
सरहद पर कठोर परिस्थितियों में तैनात सैनिकों को ये जरूरी संसाधन तक उपलब्ध करवाने में रक्षा मंत्रालय नाकाम रहा है।
हाल ही में समिति ने बीते 10 वर्षों में रक्षा मंत्रालय के स्तर पर सेना की हुई अनदेखी से थलसेना, वायुसेना और नौसेना तीनों के स्तर में आई गिरावट की रिपोर्ट (डिमांड फार ग्रांट्स 2014-15) संसद को दी है।
समिति के अध्यक्ष और पौड़ी गढ़वाल सांसद भुवनचंद्र खंडूड़ी ने बताया कि बीते 10 वर्षों में रक्षा क्षेत्र में स्वीकृत बजट का दुरुपयोग हुआ, खरीद में भी लापरवाही बरती गई। कई अहम रक्षा सौदे इस दौरान रद्द हुए, जिससे तीनों सेनाओं की हालत खराब हुई।
कहा कि यह चिंता का विषय है कि जरूरत के सामान की खरीद को लगातार टाला क्यों गया, जबकि इसे देश में कोई भी संस्था तैयार कर सकती थी। कहा कि सेना छोटे से छोटे हथियारों के लिए विदेश से खरीद पर निर्भर हो चुकी है। इससे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है।
स्वीकृति के बाद भी सेना में नहीं हुई खरीद
सेना को कभी पर्याप्त बजट नहीं दिया गया और रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार की रिपोर्ट समिति ने दी है। इसके अलावा समिति ने सेना के लिए होने वाली प्लानिंग में रक्षा मंत्रालय द्वारा उसी को दरकिनार करने तक की भी बात कही है।
सेना संसाधनों की कमी से जूझ रही है बावजूद सामानों की खरीद नहीं हो रही है। हाल यह है कि सेना के लिए पौने दो लाख बुलेट प्रूफ जैकेट खरीदने की स्वीकृति वर्ष 2009 में मिलने के बाद भी उसे नहीं खरीदा गया।
उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए दो लाख जूते (स्नो बूट) और 13 लाख अन्य जूतों की सेना में कमी के बावजूद इनकी खरीद नहीं हुई। समिति ने सेना में हथियारों की भारी कमी पर भी चिंता जताई है।
समिति का मानना है कि देश में कई ऐसे संस्थान हैं, जिनसे उपकरण खरीदे जा सकते हैं, बावजूद रक्षा मंत्रालय लगातार खरीद को टालता रहा।
...तो चीन सीमा पर सेना कैसे होगी मजबूत
समिति ने चीन सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ाने के लिए माउंटेन स्ट्राइक कोर गठित करने में जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई। स्थिति यह है कि माउंटेन स्ट्राइक कोर के गठन के लिए रक्षा मंत्रालय ने पर्याप्त बजट तक स्वीकृत नहीं किया।
67 हजार करोड़ से कोर का गठन होना है, लेकिन वार्षिक रक्षा बजट के तहत ही उसे खड़ा करने के निर्देश दिए। मात्र पांच हजार करोड़ का प्रावधान रखा गया जिससे यह संभव नहीं है।
सड़कों की फंडिंग सीधे रक्षा मंत्रालय से करने की सलाह
समिति ने सीमांत सड़कों को बेहतर बनाने और कामकाज तेज करने के लिए बीआरओ की फंडिंग सीधे रक्षा मंत्रालय से करने की सलाह दी है।
अब तक केंद्रीय भूतल एवं हाईवे मंत्रालय से सड़कों के निर्माण के लिए बीआरओ को फंड दिया जा रहा है। समिति ने माना है कि बीआरओ को स्वीकृति मिलने में देरी से सीमांत सड़कों का निर्माण समय रहते नहीं हो रहा।