उत्तराखंड में बिक रहा है 30 रुपए लीटर पानी
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उत्तराखंड के पहाड़ के दूर-दराज गांवों में लोगों पर प्यास किस कदर भारी है, इसकी एक मार्मिक तस्वीर गांव उदावा में देखी जा सकती है। चकराता ब्लाक के गांव उदावा के लोगों को महज एक कनस्तर यानी तकरीबन 10 लीटर पानी के लिए 300 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं।
गांव में स्रोत का जल स्तर घट जाने से 24 परिवारों की प्यास गांव से चार किलोमीटर दूर तलहटी में स्थित गडाउन खड्ड के भरोसे है, जहां से घोड़े-खच्चरों से पानी का ढुलान करना पड़ रहा है। उस पर भी साफ पानी नसीब नहीं।
यह पानी प्रदूषित है। गांव वाले बताते हैं कि सालों पूर्व गांव के लिए सिलीखड्ड से पेयजल लाइन बिछाई गई थी, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ स्रोत सूखता चला गया। करीब दो साल से ग्रामीण इस खड्ड का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं।
खड्ड के तलहटी में बसे होने के कारण ग्रामीणों को पानी के ढुलान के लिए घोड़े-खच्चरों की सहायता लेनी पड़ती है। जिसकी एवज में उन्हें घोड़े-खच्चरों के मालिकों को ढुलाई के रूप में प्रति कनस्तर 300 रुपए का भुगतान करना पड़ता है।
मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं
बीती दो दिसंबर को तहसील दिवस पर जिलाधिकारी ने भी जल निगम के अधिशासी अभियंता को गांव के लिए दूसरे किसी खड्ड से लाइन बिछाने के निर्देश दिए थे। लेकिन मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
कर चुके हैं चुनाव बहिष्कार तक
पानी के लिए उदावा गांव के बाशिंदे पूर्व में लोकसभा चुनाव का बहिष्कार तक कर चुके हैं, बावजूद अभी तक गांव में पानी की समस्या जस की तस है। लोग साफ कहते हैं कि शासन प्रशासन को उनकी दिक्कतों से सरोकार नहीं है।
माघ के पर्व में और बढ़ गई है परेशानी
पानी की सबसे ज्यादा कमी शादी और त्योहारों में खलती है। इस समय माघ का पर्व चल रहा है। ऐसे में परेशानी लाजिम है कि बढ़ गई है। मेहमानों की आवभगत में कमी न हो इसके लिए एक सदस्य पूरे दिन महज पानी के ढुलान में ही लगा रहता है।
गर्मियों में हालात और बदतर
प्रधान बहादुर सिंह चौहान, मातवर सिंह, अतर सिंह का कहना है कि सर्दियां तो किसी तरह कट जाती है। लेकिन गर्मियों में हालात और भी बुरे हो जाते हैं।
गांव के लिए 17 किलोमीटर दूर सिलीखड्ड से पेयजल लाइन बिछाई जानी है। इसके लिए एसडीओ को सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं।
- राज कुंवर, ईई, जल निगम, पुरोड़ी