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शोध में हुआ खुलासा: सदियों से सरीसृप प्राणियों का आशियाना रही हैं शिवालिक की पहाड़ियां, पढ़ें रोचक जानकारी
Sat, 17 Dec 2022 06:20 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 17 Dec 2022 06:20 PM IST
सार
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ पंजाब के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से शोध किया।
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इन जीवाश्मों पर हुआ शोध।
- फोटो : DEHRADUN
विस्तार
शिवालिक की पहाड़ियां 91 लाख साल पहले भी अगजर, मॉनिटर लिजर्ड का आशियाना रही हैं। इसका खुलासा हाल ही में हुए एक शोध में हुआ है। साथ ही वैज्ञानिकों को यह भी पता चला है कि 91 लाख साल पहले भी शिवालिक क्षेत्र के मौसम का मिजाज आज की तरह ही था। यानी इतने सालों में शिवालिक क्षेत्र के मौसम में खास बदलाव नहीं हुआ है।
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वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ पंजाब के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से शोध किया। वैज्ञानिकों की टीम को हिमाचल प्रदेश के विलासपुर जिले के हरितलनगर से शोध के दौरान अजगर और मॉनिटर लिजर्ट जैसे सरीसृपों के 91 लाख साल पुराने जीवाश्म मिले। इससे पता चलता है कि लाखों साल पहले शिवालिक की पहाड़ियों में औसतन आज जैसा ही मौसम रहा होगा।
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वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरके सहगल के मुताबिक छिपकलियों और अजगरों के अवशेषों को हाल ही में मिओसीन होमिनिड के बाद से खोजा गया है। हिमाचल प्रदेश के इस इलाके में शिवालिक की पहाड़ियों में 91 लाख साल पहले इन सरीसृपों का पाया जाना यह साबित करता है कि शिवालिक की पहाड़ियों में औसत वार्षिक तापमान के साथ क्षेत्र में एक मौसमी गीली उप-आर्द्र से अर्ध-शुष्क जलवायु लाखों साल पहले आज जैसी थी।
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15 से 18.6 डिग्री के आसपास रहा होगा तापमान
शोध में यह बात सामने आयी है कि शिवालिक की पहाड़ियों में उस अवधि के दौरान औसत तापमान 15 से 18.6 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा होगा। क्योंकि इस तापमान में ही अजगर, मॉनिटर लिजर्ड जैसे सरीसृप रह सकते हैं। डॉ. आरके सहगल के अनुसार छिपकली और सांप जैसे सरीसृप ठंडे खून वाले हैं। बहुत अधिक या फिर बहुत कम तापमान में इनका जीवित रहना मुश्किल हो जाता है। अजगर और मॉनिटर लिजर्ड जैसे सरीसृप प्राणियों के जीवाश्मों का शिवालिक की पहाड़ियों में पाया जाना, इस इलाके में 91 लाख साल पहले के मौसम के मिजाज का संकेत देता है। वर्तमान में भी शिवालिक की पहाड़ियों में अजगर व मॉनिटर लिजर्ड पाए जाते हैं। इससे साबित है कि क्षेत्र के मौसम में खास बदलाव नहीं आया है।
शोध में यह रहे शामिल
शोध करने वाले वैज्ञानिकों की टीम में डॉ. निंगथौजम, प्रेमजीत सिंह, डॉ. रमेश कुमार सहगल, अभिषेक प्रताप सिंह, डॉ. राजीव पटनायक, डॉ. केवल कृष्ण, शुभम दीप, डॉ. नवीन कुमार, पीयूष उनियाल, सरोज कुमार, डॉ. आंद्रेज सेरनस्की शामिल रहे। वैज्ञानिकों के शोध को प्रतिष्ठित जर्नल जियोबिओस में प्रकाशित किया गया है।