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इस फक्कड़ गुरु के सानिध्य में जो आया, तपकर बना सोना
ब्यूरो / अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Tue, 05 Sep 2017 03:57 PM IST
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उत्तराखंड में रंगकर्म की आधारशिला रखने वाले गुरु श्रीश डोभाल
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कंधे पर एक बैग, बैग में एक-दो जोड़ी कपड़े, शहर दर शहर डगर भरता एक शख्स। जिसने अपने जीवन में कभी कॅरियर, घरबार और भूख की फिक्र नहीं की। दुनिया के रंगमंच पर इस फक्कड़पन के सानिध्य में जो आया, वह तपकर सोना बना।
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ऐसा ही एक नाट्य गुरु जिसके हुनर से उत्तराखंड में रंगमंच पर कई नामी गिरामी कलाकार निखरे हैं। हम बात कर रहे हैं, उत्तराखंड में रंगकर्म की आधारशिला रखने वाले गुरु श्रीश डोभाल की।
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समूचे जीवन को रंगमंच के लिए समर्पित करने वाले नाट्यकार श्रीश डोभाल का जन्म तीर्थनगरी ऋषिकेश में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा टिहरी गढ़वाल के चंबा और बीएससी की पढ़ाई देहरादून में पूरी हुई। इसी बीच उन्हें सरकारी नौकरी भी मिली, लेकिन चाहत रंगमंच पर किरदार निभाने की थी। लिहाजा सरकारी नौकरी छोड़कर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय एनएसडी ज्वाइन कर लिया। जहां से 1984 में नाट्यशास्त्र और रंगमंच में उनका तीन वर्षीय स्नातकोत्तर प्रशिक्षण अभिनय की विशेेषज्ञता के साथ पूरा किया हुआ।
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मुंबई की बजाय उत्तराखंड की राह पकड़ी
नए रंगमंच को निखारा और एक नया स्वरूप दिया
यह दिन उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन था। एनएसडी से निकल कर वह मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में अपना कॅरियर बना सकते थे। लेकिन सार्थक जिंदगी की ख्वाहिश और रंगमंच के प्रति प्रतिबद्धता के चलते उन्होंने मुंबई की बजाय उत्तराखंड की राह पकड़ी। जहां उन्होंने नए रंगमंच को निखारा और एक नया स्वरूप दिया। उन्हें उत्तराखंड में रंगमंच की आधार शिला रखने का श्रेय भी जाता है।
अविभाजित उत्तर प्रदेश के इस दौर में श्रीश डोभाल ने विभिन्न स्थानों पर कला व साहित्य प्रेमियों के सहयोग से प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए। उत्तराखंड में रंगमंच को आधुनिक शैली व तकनीक के बूते विकसित किया। इस क्रम में उन्होंने उत्तरकाशी, कोटद्वार, टिहरी, गोपेश्वर और श्रीनगर में उत्साही युवाओं, प्राथमिक से डिग्री कॉलेज तक के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं का रुझान रंगमंच की ओर बढ़ाया।
नब्बे के दशक में अनेक प्रबुद्धजनों को रंगकर्म के आंदोलन से जोड़ा। इसकी बदौलत उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में नाट्य संस्था शैलनट की स्वतंत्र इकाईयां स्थापित हुईं। रंगकर्म के प्रति व कलाकारों को तैयार करने का उनका जुनून आज भी जारी है।
अविभाजित उत्तर प्रदेश के इस दौर में श्रीश डोभाल ने विभिन्न स्थानों पर कला व साहित्य प्रेमियों के सहयोग से प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए। उत्तराखंड में रंगमंच को आधुनिक शैली व तकनीक के बूते विकसित किया। इस क्रम में उन्होंने उत्तरकाशी, कोटद्वार, टिहरी, गोपेश्वर और श्रीनगर में उत्साही युवाओं, प्राथमिक से डिग्री कॉलेज तक के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं का रुझान रंगमंच की ओर बढ़ाया।
नब्बे के दशक में अनेक प्रबुद्धजनों को रंगकर्म के आंदोलन से जोड़ा। इसकी बदौलत उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में नाट्य संस्था शैलनट की स्वतंत्र इकाईयां स्थापित हुईं। रंगकर्म के प्रति व कलाकारों को तैयार करने का उनका जुनून आज भी जारी है।
श्रीश के लेखन-निर्देशन का सफरनामा
6 निर्देशित नाटकों का अंतरराष्ट्रीय समारोह में सफल मंचन
- फोटो : demo pic
श्रीश डोभाल ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को कई डाक्यूमेंट्री फिल्मों के जरिए संजोए रखा है। साथ ही 15 भाषाओं में नाटकों का निर्देशन, 11 नाटकों का अनुवाद, 8 विदेशी, एक कन्नड़, हिंदी और गढ़वाली से अंग्रेजी, महाभारत पर आधारित गरुड़ व्यूह का लेखन के साथ ही 35 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय निर्देशकों के साथ अभिनय, 6 निर्देशित नाटकों का अंतरराष्ट्रीय समारोह में सफल मंचन।
इसके साथ ही श्रीश डोभाल ने प्रख्यात निर्देशकों के साथ तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्मों में अभिनय किया है। वह 20 टीवी धारावाहिक, कई टेली फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। श्रीश डोभाल उत्तराखंड समेत कई राज्यों में नाट्य विधा के प्रसार के चलते कई दफा विभिन्न पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं। इस नाट्य गुरु का संपूर्ण जीवन रंगमंच को समर्पित रहा है। इनकी पाठशाला से निकले कई शिष्य देशभर में इस विधा को आगे ले जाने में जुटे हैं।
थियेटर व फिल्मों में चमके सितारे
श्रीश डोभाल से प्रशिक्षित कलाकार दिनेश उनियाल, अनुराग वर्मा, देवकी नंदन भट्ट, राजीव शर्मा, संजय बडोनी, राकेश भट्ट, प्रो. डीआर पुरोहित, तानिया पुरोहित, ईशान डोभाल आदि रंगमंच, फिल्मों के साथ संगीत के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं।
फिल्मों में किया अभिनय
श्रीश डोभाल प्रकाश झा की परिणीति, जापार पटेल की फिल्म अंबेडकर, दीपक रॉय की धन्ना में अभिनय का लोहा मनवा चुके हैं। जबकि वह पांच भाई कठैत, दिल्ली चलो, डाकिये, बिछुड़े बंदर का पंजा आदि नाटकों का निर्देशन व अभिनय कर चुके हैं।
इसके साथ ही श्रीश डोभाल ने प्रख्यात निर्देशकों के साथ तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्मों में अभिनय किया है। वह 20 टीवी धारावाहिक, कई टेली फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। श्रीश डोभाल उत्तराखंड समेत कई राज्यों में नाट्य विधा के प्रसार के चलते कई दफा विभिन्न पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं। इस नाट्य गुरु का संपूर्ण जीवन रंगमंच को समर्पित रहा है। इनकी पाठशाला से निकले कई शिष्य देशभर में इस विधा को आगे ले जाने में जुटे हैं।
थियेटर व फिल्मों में चमके सितारे
श्रीश डोभाल से प्रशिक्षित कलाकार दिनेश उनियाल, अनुराग वर्मा, देवकी नंदन भट्ट, राजीव शर्मा, संजय बडोनी, राकेश भट्ट, प्रो. डीआर पुरोहित, तानिया पुरोहित, ईशान डोभाल आदि रंगमंच, फिल्मों के साथ संगीत के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं।
फिल्मों में किया अभिनय
श्रीश डोभाल प्रकाश झा की परिणीति, जापार पटेल की फिल्म अंबेडकर, दीपक रॉय की धन्ना में अभिनय का लोहा मनवा चुके हैं। जबकि वह पांच भाई कठैत, दिल्ली चलो, डाकिये, बिछुड़े बंदर का पंजा आदि नाटकों का निर्देशन व अभिनय कर चुके हैं।