उत्तराखंड: चीन सीमा पर भेड़ पालकों को मिली चुगान की अनुमति, 200 लोगों ने किया आवेदन
- सीमा पर तनाव और कोरोना के चलते इस साल अनुमति देर से मिली
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कोरोना महामारी के साथ भारत-चीन सीमा पर तनाव के चलते भेड़ पालकों को चीन सीमा पर चुगान की अनुमति नहीं मिल पा रही थी। अब भारत सरकार की गाइडलाइन मिलने के बाद प्रशासन ने उनको अनुमति दे दी है। भेड़ पालक हर साल चीन सीमा पर बाड़ाहोती, रिमखिम बॉर्डर, माणा पास के गसतोली तक चुगान के लिए अनुमति लेकर जाते हैं।
उत्तराखंड में चमोली जिले के भेड़ पालक करीब एक माह से अनुमति नहीं मिलने से परेशान थे। जगह-जगह आरक्षित वन क्षेत्र होने और वनीकरण होने से भेड़-बकरियों के लिए चुगान की समस्या खड़ी हो गई थी। दरअसल, कोरोना महामारी के बीच भारत और चीन सीमा पर तनाव की स्थिति को देखते हुए भारत सरकार से गाइडलाइन नहीं मिलने से प्रशासन इनको अनुमति नहीं दे पा रहा था।
अब भारत सरकार की ओर से गाइडलाइन आ चुकी है। जिसके बाद प्रशासन ने अभी तक 84 भेड़-बकरी पालकों के पास बना लिए हैं, कुछ के पास बनाने की प्रक्रिया चल रही है। पास बनने से भेड़ पालकों ने राहत की सांस ली है।
करीब 200 ने किए हैं आवेदन
इस साल भारत के क्षेत्र में चीन सीमा पर चुगान के लिए करीब 200 भेड़-बकरी पालकों ने आवेदन किए हैं। पिछले साल करीब 150 भेड़ पालक चीन सीमा पर चुगान के लिए गए थे। यह भेड़ पालक गर्मी में भेड़-बकरी चुगान के लिए चीन सीमा पर बाड़ाहोती, रिमखिम और माणा बॉर्डर पर गसतोली तक जाते हैं। सर्दी शुरू होने पर लौट आते हैं।
भारत सरकार की गाइडलाइन आने के बाद भेड़ पालकों के पास बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अभी तक 84 के पास बन चुके हैं। अन्य के पास बनाने की प्रक्रिया गतिमान है। आवेदन करने वाले सभी को अनुमति दी जा रही है।
अनिल चन्याल, एसडीएम जोशीमठ