'साईं मंदिरों में होता है हिंदू देवताओं का अपमान'
शारदा और ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने शुक्रवार सुबह पूजा के बाद आषाढ़ अमावस्या पर भक्तों के साथ वीआईपी घाट पर स्नान किया और विश्व कल्याण की कामना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि आराध्य देवों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्नान के बाद मठ लौटते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वे अपने मत से कभी हटे नहीं हैं।
दुर्भाग्य का विषय है कि साईं के मंदिरों में साईं की प्रतिमा तो छत का स्पर्श कराते हुए ऊंची बनाई जाती है, जबकि शिव, राम और कृष्ण की छोटी-छोटी मूर्तियां उनके पांव के पास रख दी जाती हैं। यह हमारे आराध्य देवों का अपमान है।
साईं को गुरू कहने पर कड़ा ऐतराज
शंकराचार्य ने कहा कि हमारे आराध्य देवों का अपमान इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोई भी गुरु राम-कृष्ण से बड़ा नहीं हो सकता।
जहां तक साईं बाबा का सवाल है, उन्हें गुरु कहना भी नहीं चाहिए। एक मुसलमान को गुरु मानने वालों का दायित्व है कि वे भटकन से बाहर निकलें।
अब सभी की समझ में आ गया है कि साईं मंदिरों में जाने से किसी को लाभ मिलने वाला नहीं हैं। कईं विभागों के अधिकारी शंकराचार्य के संमुख दंडवत करने पहुंचे।
काशी विद्वत परिषद ने किया समर्थन
शंकराचार्य स्वरूपानंद के उत्तराधिकारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि काशी विद्वत परिषद ने साईं बाबा के संबंध में शंकराचार्य द्वारा व्यक्त की राय को समर्थन प्रदान किया है।
गौरतलब है कि शंकराचार्यों को विभिन्न पीठों पर आसीन करने का काम काशी विद्वत परिषद ही करती है। इसलिए विद्वत परिषद के बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।