कुर्सी बचाने के लिए रावत का 'टोटका'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद की संभावित राजनैतिक आपदा से निपटने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मैनेजमेंट शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने विरोधी गुट के विधायकों को अपना बनाने के लिए उन्हें बृहस्पतिवार को शॉर्ट नोटिस पर सभा सचिव पद की शपथ दिलाई।
एग्जिट पोल के नतीजों ने उत्तराखंड की सरकार पर संभावित खतरे और भाजपा की ओर से मिल रही धमकी के मद्देनजर अपने कील-कांटे दुरुस्त करने शुरू कर दिए हैं।
विरोधी खेमों को साधने की जुगत
सरकार मान कर चल रही है कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर कम से कम सतपाल महाराज तो चुप नहीं बैठेंगे। ऐसे में मुख्यमंत्री ने अपने विरोधी अन्य गुटों के साथ तालमेल बैठाना शुरू कर दिया है।
राजनीतिक बिसात पर मजबूत प्यादे बैठाने वाले मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने तीन महीने के कार्यकाल में इस बात का अंदाजा लगा चुके हैं कि उन्हें सभी गुटों को साथ लेकर ही चलना पड़ेगा तभी उनकी पारी लंबी होगी।
बृहस्पतिवार को जिन सात विधायकों को विकास कार्य में तेजी लाने के लिए सभा सचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई उनमें अधिकतर विजय बहुगुणा के करीबी माने जाते हैं। इतना ही नहीं पिछले दिनों बहुगुणा के घर हुई बैठक में लगभग यही विधायक शामिल थे।
इनकी चमकी किस्मत
सचिवालय में हुए शपथ ग्रहण समारोह में बहुगुणा के करीबियों में उमेश शर्मा काऊ, राजकुमार और विक्रम सिंह नेगी को सभा सचिव बनाया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य के रिश्तेदार और कभी सतपाल महाराज के करीबी कहे जाने वाले डॉ. जीतराम भी इस सूची में शामिल हैं।
हरीश रावत के धुर विरोधी और हरक सिंह रावत के करीबियों में मदन सिंह बिष्ट और शैलारानी रावत को भी सभा सचिव बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने अपने खेमे के विधायकों में सरिता आर्या को मौका दिया है।
33 विधायकों में 12 बन गए सचिव
मुख्यमंत्री की कुर्सी कितनी खींचतान के बाद मिली थी इसी को ध्यान में रखकर हरीश रावत ने अभी तक ऐसा कोई परिवर्तन भी नहीं किया है।
मुख्यमंत्री बनने के तत्काल बाद उन्होंने उन्हीं पांच विधायकों को सभा सचिव की दोबारा शपथ दिला दी थी जिन्हें विजय बहुगुणा ने चुना था।
अभी तक फुरकान अहमद, विजयपाल सजवाण, गणेश गोदियाल, मनोज तिवारी और हेमेश खर्कवाल सभा सचिव थे। अब कांग्रेस के 33 विधायकों में सभा सचिवों की संख्या 12 हो गई है।
क्या कहते हैं हरीश रावत
शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके कोई अन्य मायने-मतलब नहीं निकाले जाने चाहिए। सरकार का कामकाज बढ़ा है और लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संगठन के कुछ लोगों को इसमें शामिल किया जाएगा। सभा सचिवों की संख्या बढ़ने से विकास कार्यों में तेजी आएगी।
इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी कुछ मिनट के लिए मौजूद थे।