देशभर में हॉलमार्किंग ज्वेलरी बेचने का नियम लागू, लेकिन देहरादून में केवल 100 दुकानों के पास लाइसेंस
- दून में हॉलमार्क ज्वेलरी बेचने का लाइसेंस केवल 100 के पास
- राजधानी में करीब 1000 ज्वैलर्स, सराफा मंडल में 700 रजिस्टर्ड
- हॉलमार्किंग का नियम लागू हुआ तो ज्वैलर्स लगा रहे रजिस्ट्रेशन को दौड़
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देशभर में हॉलमार्किंग ज्वेलरी बेचने का नियम लागू हो गया है। 15 जनवरी 2021 के बाद किसी भी सूरत में बिना हॉलमार्किंग वाली ज्वेलरी नहीं बेच सकेंगे। अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि देहरादून में करीब 1000 में से मात्र 100 ज्वैलर्स के पास हॉलमार्किंग का लाइसेंस है।
ज्वैलर्स के लिए हॉलमार्किंग इस वक्त सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। बेहद कम संख्या में ज्वैलर्स का रजिस्ट्रेशन है। दून जिले में सराफा मंडल के तहत करीब 700 ज्वैलर्स रजिस्टर्ड हैं। जबकि इनके अलावा करीब 300 ज्वैलर्स हैं। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) से मिली जानकारी के मुताबिक, अभी तक इनमें से मात्र 100 ज्वैलर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
सोने के लिए दो लैब, चांदी के लिए काट रहे चक्कर
राजधानी में बीआईएस से प्रमाणित दो लैब चल रही हैं। यह दोनों ही धामावाला बाजार में हैं। इनमें केवल गोल्ड ज्वेलरी की हॉलमार्किंग ही होती है। अगर किसी ज्वैलर को चांदी की ज्वेलरी की हॉलमार्किंग करानी है तो उसे सहारनपुर, मेरठ या दिल्ली के चक्कर काटने पड़ते हैं।
ऋषिकेश-विकासनगर के ज्वैलर्स परेशान
हॉलमार्किंग पर सख्ती होने के साथ ही ऋषिकेश और विकासनगर के ज्वैलर्स परेशान हैं। दरअसल, वहां अभी तक बीआईएस टेस्टिंग व हॉलमार्किंग लैब नहीं है। इसलिए उन्हें हॉलमार्किंग के लिए देहरादून आना पड़ता है।
लैब में जुटने लगी भीड़
हॉलमार्किंग पर सरकार की सख्ती शुरू होने के साथ ही दोनों लैब्स में भीड़ जुटने लग गई है। बीआईएस रिकॉगनाइज्ड एसेइंग एंड हॉलमार्किंग लैब के क्वालिटी मैनेजर सूरज ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में ज्वैलर्स जागरूक हुए हैं। उन्होंने उनकी सुविधा के लिए पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी है।
तीन साल से सभी साथियों को हॉलमार्किंग के लिए जागरूक कर रहे हैं। ज्वैलर्स की सुविधा के लिए हमने अलग से एक व्यक्ति को जिम्मेदारी दी है ताकि वह आसानी से बीआईएस रजिस्ट्रेशन करा सकें। 15 जनवरी 2021 तक अधिक से अधिक ज्वैलर्स रजिस्टर्ड हो जाएंगे। - सुनील मैसोन, अध्यक्ष, सराफा मंडल, देहरादून
चार निशान से पहचानें, ज्वेलरी हॉलमार्क है या नहीं
किसी भी ज्वेलरी की हॉलमार्किंग की पहचान के चार निशान होते हैं। आप भी ज्वेलरी खरीदने जाएं तो इन निशानों को देखकर उसकी गुणवत्ता की पहचान कर सकते हैं। इसके लिए सभी ज्वैलर्स के पास लेंस होता है।
1. बीआईएस : हर ज्वेलरी पर ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) का तिकोना निशान होता है।
2. कैरेट : हर ज्वेलरी पर उसकी शुद्धता के प्रतीक के रूप में यह दर्ज होता है। मसलन, अगर 22 कैरेट की ज्वेलरी है तो उस पर 22के916, 18 कैरेट है तो उस पर 18के750 और अगर 14 कैरेट है तो उस पर 14के585 लिखा होगा।
3. सेंटर लोगो : हर ज्वेलरी पर बीआईएस लैब की यह पहचान होती है। यानी वह ज्वेलरी बीआईएस की किस लैब से प्रमाणित है।
4. ज्वेलर का लोगो : हर ज्वेलरी पर उस ज्वेलर का भी लोगो होता है।
अगले वर्ष से 12, 18 और 22 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी
केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 से केवल तीन कैटेगरी की गोल्ड ज्वेलरी बेचने की अनुमति जारी की गई है। इसके तहत 12 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट की ज्वेलरी बेची जा सकेगी। अगले साल से इस नियम की अनदेखी करने पर जुर्माना और एक साल तक की जेल की सजा हो सकती है।