Uttarakhand: आंदोलनकारियों के आरक्षण बिल का मामला, प्रवर समिति ने विस अध्यक्ष को सौंपी रिपोर्ट
प्रवर समिति के सभापति एवं संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विनोद चमोली ने यमुना कॉलोनी स्थित शासकीय आवास पर विधानसभा अध्यक्ष को आरक्षण ड्राफ्ट पर रिपोर्ट सौंपी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के ड्राफ्ट पर प्रवर समिति ने रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण को सौंप दी है। जल्द ही आरक्षण बिल पारित करने के लिए सरकार सत्र आहूत करेगी।
प्रवर समिति ने रिपोर्ट बंद लिफाफे में दी है। इसे सदन पटल पर रखा जाएगा। बृहस्पतिवार को प्रवर समिति के सभापति एवं संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विनोद चमोली ने यमुना कॉलोनी स्थित शासकीय आवास पर विधानसभा अध्यक्ष को आरक्षण ड्राफ्ट पर रिपोर्ट सौंपी है।
प्रवर समिति ने रिपोर्ट में आंदोलनकारियों के आश्रितों की श्रेणी में विधवा, तलाकशुदा, परित्याक्ता बेटियों को शामिल करने की सिफारिश की है। इसके अलावा पूर्व में आरक्षण कोटे से कई विभागों में तैनात राज्य आंदोलनकारियों के हितों को सुरक्षित रखने का प्रावधान किया है। मीडिया से बातचीत में मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा, प्रवर समिति ने पांच बैठकें कर आरक्षण ड्राफ्ट के एक-एक बिंदुओं पर मंथन किया है।
कहा, जिससे आने वाले समय में आरक्षण को लेकर कोई दिक्कत न आए। राज्य स्थापना दिवस पर समिति ने आरक्षण को लेकर रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दी है। आरक्षण बिल को पारित करने के लिए जल्द ही सत्र आहूत किया जाएगा। रिपोर्ट को सदन पटल रखने के बाद ही आरक्षण बिल को पारित किया जाना है।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: 300 शिक्षकों को बड़ी राहत, पूर्व तैनाती पर रहेंगे, 40% दिव्यांग कर्मचारियों के भी होंगे तबादले
प्रवर समिति में ये थे सदस्य
संसदीय कार्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित प्रवर समिति में विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विनोद चमोली, उमेश शर्मा काऊ, भुवन कापड़ी, मोहम्मद शहजाद व मनोज तिवारी बतौर सदस्य थे।
कब क्या हुआ
- आठ सितंबर को विधानसभा सत्र में सरकार ने पेश किया राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण विधेयक।
- 11 सितंबर को विधानसभा सचिवालय ने प्रवर समिति के गठन की अधिसूचना जारी की।
- 18 सितंबर को प्रवर समिति की पहली बैठक।
- 25 सितंबर को प्रवर समिति का 15 दिन का कार्यकाल पूरा।
- 25 सितंबर को विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने समिति का कार्यकाल एक माह बढ़ाया।
- नौ अक्तूबर को विपक्ष के सदस्य न पहुंचने से प्रवर समिति की बैठक स्थगित।
- 11 अक्तूबर को प्रवर समिति की बैठक।
- 31 अक्तूबर को प्रवर समिति ने आरक्षण मुद्दे पर लिया निर्णय।
- तीन नवंबर को अंतिम बैठक में ड्राफ्ट पर लगाई मुहर।
- नौ नवंबर को प्रवर समिति ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी रिपोर्ट।
राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण पर प्रवर समिति ने रिपोर्ट दी है। इस पर जो भी कार्रवाई की जानी है, उसे जल्द किया जाएगा। सत्र आहूत करने का निर्णय सरकार को लेना है। हम राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान करते हैं। प्रदेश सरकार आंदोलनकारियों को बेहतर सुविधाएं देना चाहती है। समिति की रिपोर्ट बंद लिफाफे में है। मैं मानती हूं कि लिफाफे से जो निकलेगा, वह राज्य आंदोलकारियों के हित में होगा।
- ऋतु खंडूड़ी भूषण, अध्यक्ष, विधानसभा