स्कॉटलैंड में रहने वाले भारतीय नहीं चाहते 'बंटवारा'
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स्कॉटलैंड में रह रहे उत्तराखंड के लोग नहीं चाहते कि ब्रिटेन और स्कॉटलैंड में अलगाव हो। उनका मानना है कि इस समय मिल रही अनेक सुविधाएं नए निजाम में छिन सकती हैं।
‘अमर उजाला’ ने जब इस मामले पर उनसे संपर्क किया तो उन्होंने खुलकर राय जाहिर की कि विभाजन के बाद इतनी सुविधाएं मिलने पाने में संदेह है। इन सुविधाओं की वजह से अभी यहां काफी खुशहाली है।
मूल रूप से उत्तरकाशी की रहने वाली सीमा गौर सजवाण स्कॉटलैंड के ग्लासगो में रह रही हैं। उनके पति रोहित यहां रेस्टोरेंट चलाते हैं। सीमा ने बताया कि इस वक्त यहां बेहतर सुविधाएं हासिल हैं। खासकर पढ़ाई और मेडिकल सुविधाओं के फ्री होने से जीवनयापन आसान है।
निजी कंपनी में कार्यरत गीता जोशी एडिनबर्ग में रह रही हैं। बकौल गीता, अलग किए जाने की बात गले से नीचे नहीं उतर रही। ऐसा नहीं होना चाहिए। अभी यहां लोगों को काफी सुविधाएं हैं। आशंका है कि शायद बाद में यह न रहें।
लोगों में दूरी और विवाद पैदा होने की आशंका
दून की रहने वाली अंजनी जोशी का ग्लासगो में कंप्यूटर डिजाइनिंग का काम है। उनकी उनकी नजर में स्कॉटलैंड के अलग होने से कोई लाभ नहीं होने वाला। इससे स्काटिश और अन्य लोगों में दूरी और विवाद पैदा होने की भी आशंका है।
वंदना तिवारी भी ग्लासगो में ही रह रही हैं। उनके पति का यहां रेस्टोरेंट है। हल्द्वानी से ताल्लुक रखने वाली वंदना का मानना है कि डर के बीच विभाजन और इससे उत्पन्न नकारात्मकता लोगों के लिए अवसरों को सीमित करेगी।
स्कॉटलैंड को ब्रिटेन से अलग नहीं होना चाहिए। मूल रूप से टिहरी से संबंध रखने वाली कविता इस वक्त अपने पति प्रताप और परिवार के साथ ग्लासगो में रहती हैं। वे कहती हैं कि यहां बच्चों के लिए एक लेवल तक निशुल्क शिक्षा है। पता नहीं अलग होने के बाद नियम-कानून में किस तरह की तब्दीली हो।