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वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने पैरोल से प्राकृतिक रेशा बनाने की तकनीक को किया याद
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एफआरआई के निदेशक अरूण सिंह रावत उत्तराखंड बांस और रेशा बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज च?
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वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने पिरूल से प्राकृतिक रेशा बनाने की तकनीक ईजाद की है। इतना ही नहीं तकनीक विकसित करने के बाद वन अनुसंधान संस्थान और उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास बोर्ड के बीच तकनीक स्थानांतरण की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक अरुण सिंह रावत और उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास बोर्ड के सीईओ मनोज चंद्रन की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। निदेशक अरुण सिंह रावत के मुताबिक पिरूल से प्राकृतिक रेशा बनाने की तकनीक से जहां उत्तराखंड समेत देश के पर्वतीय राज्यों में रोजगार के बेहतर अवसर विकसित होंगे साथ ही पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी। वहीं, हर साल पिरूल के चलते जंगलों में बड़े पैमाने पर लगने वाली आग को भी रोका जा सकेगा। इससे वन संपदाएं भी बच सकेंगी। बताया कि पिरूल से प्राकृतिक रेशा बनाने की तकनीक के पेटेंट के लिए भी आवेदन कर दिया गया है।
समझौते के दौरान निदेशक अरुण सिंह रावत के अलावा वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनीत कुमार, वाईसी त्रिपाठी, डॉ. वीके वार्ष्णेय, डॉ. एनके उप्रेती समेत तमाम वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
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वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक अरुण सिंह रावत और उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास बोर्ड के सीईओ मनोज चंद्रन की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। निदेशक अरुण सिंह रावत के मुताबिक पिरूल से प्राकृतिक रेशा बनाने की तकनीक से जहां उत्तराखंड समेत देश के पर्वतीय राज्यों में रोजगार के बेहतर अवसर विकसित होंगे साथ ही पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी। वहीं, हर साल पिरूल के चलते जंगलों में बड़े पैमाने पर लगने वाली आग को भी रोका जा सकेगा। इससे वन संपदाएं भी बच सकेंगी। बताया कि पिरूल से प्राकृतिक रेशा बनाने की तकनीक के पेटेंट के लिए भी आवेदन कर दिया गया है।
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समझौते के दौरान निदेशक अरुण सिंह रावत के अलावा वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनीत कुमार, वाईसी त्रिपाठी, डॉ. वीके वार्ष्णेय, डॉ. एनके उप्रेती समेत तमाम वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
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