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नेपाल भूकंपः अब 100 साल तक सेफ रहेगा लामजुंग

Fri, 01 May 2015 04:30 PM IST
प्रवेश कुमारी/ अमर उजाला, देहरादून
प्रवेश कुमारी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 01 May 2015 04:30 PM IST
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scientist report in nepal earthquake.

नेपाल में भूकंप के झटके लगने का सिलसिला थमा नहीं है। गुरुवार सुबह भी गोरखा के पास रिक्टर पैमाने पर 4.2 की तीव्रता वाले भूकंप से जमीन डोल गई। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो 7.9 की तीव्रता का दंश झेल चुका लामजुंग कुछ राहत ले सकता है।

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वाडिया हिमालयन भू विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय पॉल के मुताबिक अभी तक यह सामने आया है कि ग्रेट मैग्नीट्यूड के भूकंप से प्रभावित स्थान पर 100 साल तक बड़े भूकंप की संभावना कम हो जाती है।
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यह अलग बात है कि इतने बड़े भूकंप के बाद लगने वाले आफ्टरशॉक से भूकंप प्रभावित स्थानों पर दरारें और चौड़ी हो सकती हैं, जिससे नुकसान में बढ़ोतरी हो सकती है। नेपाल में ताजा झटका गुरुवार सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर लगा।

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सतह के नजदीक होने की वजह से खतरनाक

scientist report in nepal earthquake.

वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ भूकंप वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार के अनुसार इसकी गहराई 10 किलोमीटर आंकी गई है। विशेषज्ञों की मानें तो कम गहराई ही अधिक जान-माल के नुकसान की वजह है।

अभी तक आए बड़े भूकंपों (रिक्टर पैमाने पर 6 से अधिक तीव्रता वाले) में यही बात साबित हुई है। उत्तराखंड को ही लें। चाहे 1991 में आए उत्तरकाशी भूकंप की बात करें या फिर 1999 में आए चमोली भूकंप की, दोनों ही भूकंपों की स्थिति में गहराई 10-12 किलोमीटर रही है।

विशेषज्ञों की मानें तो 27 किलोमीटर तक की गहराई छिछली ही मानी जाती है। भूकंप का केंद्र (एपिसेंटर) सतह के नजदीक होने की वजह से इसका असर बेहद खतरनाक होता है। नेपाल में भी यही हो रहा है। पूरी हिमालयन बेल्ट भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है।

लिहाजा इस तरह के झटके देखने को मिलते रहेंगे। बता दें कि इसी 25 अप्रैल को नेपाल के काठमांडू से 80 किलोमीटर की दूरी पर आए भूकंप में अब तक 4000 से अधिक मौतों की बात कही जा रही है।

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