स्कूल एडॉप्शन प्रोग्राम: अब कॉरपोरेट संभालेंगे और संवारेंगे उत्तराखंड के सरकारी स्कूल
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प्रदेश के खस्ताहाल सरकारी विद्यालयों में ढांचागत सुविधाएं बढ़ाने के लिए सरकार ने स्कूल एडॉप्शन प्रोग्राम शुरू किया है। राज्य मंत्रिमंडल ने योजना पर अपनी मुहर लगा दी। इसके तहत स्वयं सेवी संस्थाएं व कॉरपोरेट हाउस स्कूलों को गोद लेकर वहां ढांचागत सुविधाएं व शिक्षा की गुणवत्ता सुधार सकेंगे।
इसके तहत खस्ताहाल व जर्जर हालत वाले विद्यालयों पर विशेष फोकस रहेगा। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में प्रत्येक जिले में एक समिति का गठन किया जाएगा, जो स्कूलों का चयन करेगी। इसके बाद उन्हें गोद लेने की इच्छुक स्वयं सेवी संस्थाओं और कॉरपोरेट हाउस को उनकी व्यवस्था दी जाएगी। योजना के तहत वह स्कूलों में भवन निर्माण, मरम्मत करने के साथ ही फर्नीचर, पाठ्य सामग्री, खेल कूद का सामान और बच्चों के लिए अन्य सामग्री प्रदान कर सकते हैं। इसके साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए पुस्तकालय, पत्र-पत्रिकाओं और अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था भी कर सकते हैं। पहले चरण में केवल उन्हीं स्कूलों को गोद दिया जाएगा, जिनकी हालत ज्यादा खराब है।
सीएसआर से मिले फर्नीचर
प्रदेश के सैकड़ों विद्यालयों को पिछले कुछ सालों के दौरान सीएसआर से फर्नीचर समेत अन्य सामान मिला है। अकेले ओएनजीसी सैकड़ों विद्यालयों को फर्नीचर दे चुुका है। इसके अलावा कई अन्य कॉरपोरेट हाउस व स्वयं सेवी संस्थाएं भी इस काम में आगे आई हैं। उन्होंने स्कूलों में फर्नीचर के साथ ही वाटर प्यूरीफायर, पंखे, पाठ्य सामग्री समेत अन्य सामान उपलब्ध कराए हैं।
डीएम ऊधमसिंह नगर ने दिया प्रस्ताव
स्कूल एडॉप्शन प्रोग्राम का प्रस्ताव जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर डा. नीरज खैरवाल ने दिया था। उन्होंने अपने जिले के कुछ विद्यालयों में निजी संस्थाओं के साथ मिलकर सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव दिया। राज्य मंत्रिमंडल को यह प्रस्ताव अच्छा लगा, जिसके बाद उसे राज्य स्तर पर लागू करने पर सहमति बनी।