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छात्रवृत्ति घोटाला: शासन की दरियादिली पर उठे सवाल, जेल जाने पर भी संयुक्त निदेशक का निलंबन नहीं! 

Wed, 13 Nov 2019 08:22 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 13 Nov 2019 08:22 AM IST
सार

  • 14 नवंबर को पूरी हो जाएगी न्यायिक अभिरक्षा की अवधि
  • आखिरी क्षण तक गिरफ्तारी से बचते रहे थे गीताराम नौटियाल

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Scholarship Scam uttarakhand: Geetaram nautiyal not suspended even Gone to jail
गीताराम नौटियाल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में जेल गए समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक गीता राम नौटियाल पर अब भी शासन मेहरबान बना हुआ है। शासन को जब तक लिखित में यह सूचना प्राप्त नहीं होगी कि संयुक्त निदेशक को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है, तब तक उन पर निलंबन की कार्रवाई नहीं होगी।

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14 नवंबर को नौटियाल की न्यायिक अभिरक्षा की अवधि पूरी हो जाएगी। शासन की इस हीलाहवाली पर सवाल उठने लगे हैं। उधर, अपर सचिव (समाज कल्याण) डॉ.राम विलास यादव का कहना है कि विभागीय स्तर पर निलंबन का ड्राफ्ट तैयार है और जैसे ही शासन को सूचना प्राप्त होगी, निलंबन आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
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 नौटियाल के प्रकरण के अभियोजन अधिकारी एएसपी आयुष अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने अभियोजन की कार्यवाही की पूरी रिपोर्ट न्यायालय में सौंप दी है। उनके स्तर से शासन को कोई सूचना नहीं दी जानी है। ऐसे में प्रश्न यह है कि शासन को यह सूचना किस स्तर से दी जानी है कि नौटियाल को जेल भेज दिया गया है।

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14 दिन के रिमांड पर जेल भेजे गए थे

नौटियाल एक नवंबर को 14 दिन के रिमांड पर जेल भेजे गए थे। इसके बाद यह माना जा रहा था कि शासन उन्हें निलंबित कर देगा। बुधवार को नौटियाल की रिमांड अवधि के 13 दिन पूरे हो जाएंगे, लेकिन अब तक शासन में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

इसे नौटियाल की शासन में तगड़ी पैंठ के तौर पर देखा जा रहा है। इसके विपरीत जनजातीय कल्याण विभाग के उपनिदेशक अनुराग शंखधर के मामले शासन स्तर से निलंबन की कार्रवाई कर दी गई थी।

आखिरी क्षण तक गिरफ्तारी से बचते रहे हैं नौटियाल
नौटियाल गिरफ्तारी से बचने के लिए खूब हाथ पांव मारते रहे हैं। एसआईटी ने जब उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट और कुर्की के आदेश जारी कराए, तब नौटियाल सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट से जब उन्हें एसआईटी के समक्ष सरेंडर करने के आदेश हुए तब जाकर उन्होंने एसआईटी के रोशनाबाद स्थित कार्यालय में सरेंडर किया। फिर उन्हें अदालत ने रिमांड पर जेल भेज दिया।

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