'घर में रखा कूड़ा तो देना होगा 400 जुर्माना'
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राजधानी देहरादून में घरों से कूड़ा उठाने आने वाले डोर-टू-डोर वाहनों को कूड़ा नहीं देने वालों पर चार सौ रुपए प्रतिमाह का अर्थ दंड लगाया जाएगा।
शुक्रवार को मुख्य नगर अधिकारी हरक सिंह रावत ने यह निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि नगर निगम के वाहनों को ही कूड़ा देना अनिवार्य किया गया है। सोमवार से इसकी मानीटरिंग की जाएगी। नगर निगम के क्षेत्र के सुपरवाइजर इसकी मानीटरिंग करेंगे।
दरअसल, लोगों के घरों से कूड़ा लेने के लिए जब नगर निगम की गाड़ी आती है तो बहुत से लोग उसे कूड़ा नहीं देते हैं।
ऐसे लोग बाद में कूड़े को नदियों, खाली प्लाटों और अन्य जगहों पर ठिकाने लगाते हैं। नगर निगम ऐसे लोगों पर अब अर्थ दंड लगाएगा। जो व्यक्ति घर कूड़ा लेने आई निगम की गाड़ी को कूड़ा नहीं देगा, उससे चार सौ रुपए प्रति माह वसूला जाएगा। जबकि नगर निगम की गाड़ी को कूड़ा देने वाले को प्रतिमाह 40 रुपए देने होते हैं।
कौन देगा सफाई कर्मियों का वेतन
नगर निगम ने घर-घर कूड़ा उठाने वाली कंपनी डीवीडब्ल्यूएम से कूड़ा उठान अपने हाथ में तो ले लिया है लेकिन सफाई कर्मचारियों को वेतन कौन देगा इसकी स्थिति साफ नहीं हो पाई है।
दरअसल, डीवीडब्ल्यूएम कंपनी के लिए काम करने वाले सफाई कर्मचारी नगर निगम के लिए काम कर रहे हैं, जबकि इनका भुगतान जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट के तहत किया जाना है।
नियमानुसार जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट के तहत शासन सिर्फ आउटसोर्स कंपनी को भुगतान कर सकता है। निगम कंपनी के कर्मचारियों से काम तो करा रहा है लेकिन उसने शासन से इसकी मंजूरी नहीं ली है। ऐसे में इन कर्मचारियों का भुगतान कैसे होगा, इस पर मेयर विनोद चमोली समेत आला अफसर सिर खपाने में जुटे हैं।
जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट के तहत नगर निगम क्षेत्र में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान के लिए आउटसोर्स कंपनी होनी जरूरी है।
जानकारों के मुताबिक नगर निगम खुद यह काम नहीं कर सकता। विवाद के बाद कूड़ा उठाने वाली कंपनी से सभी साठ वार्डों का कूड़ा उठाने का काम दून निगम ने अपने हाथ में ले लिया है।
...तो दो साल तक निगम ही उठाएगा कूड़ा!
शासन डोर टू डोर कूड़ा उठान के लिए नए टेंडर कराने की तैयारी में है। लेकिन टिपिंग फीस और रिसाइकिलिंग प्लांट में देरी को देखते हुए शायद ही कोई कंपनी इसमें दिलचस्पी ले।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने प्लांट संबंधी विवादों का निस्तारण कर नगर निगम को जल्द प्लांट बनाने के लिए कहा है। फिर भी प्लांट पूरा होने में करीब दो साल का समय लग सकता है।
ऐसे में इस अवधि तक निगम को ही कूड़ा उठाना पड़ सकता है। लंबे विवाद के बाद डीवीडब्ल्यूएम कंपनी से काम लेकर निगम कूड़ा उठाने का काम कर रहा है। विवाद की वजह कंपनी का घाटे में जाना था।
दरअसल, कंपनी को फायदा कूड़ा उठान से नहीं, रिसाइकिलिंग प्लांट से होना था, जोकि निगम कर नहीं पाया। ऐसे में कंपनी ने निगम से गुजारिश की कि जब तक प्लांट तैयार न हो, टिपिंग फीस बढ़ा दी जाए।
मगर निगम ने फीस नहीं बढ़ाई। डीवीडब्ल्यूएम कंपनी के सीईओ सिद्धार्थ जैन का कहना है कि एमओयू के मुताबिक कूड़ा उठान शुरू होने के एक साल बाद रिसाइकिलिंग प्लांट शुरू होना था। लेकिन प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया।