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उत्तराखंडः घोटालों की जांच में हो रहा घोटाला
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 25 Jun 2015 12:53 PM IST
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अभी तक घोटाले होते थे लेकिन अब जांच में भी घोटाले होने लगे हैं। इसकी बानगी उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के शासनकाल में देखने को मिली।
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2007 में भाजपा ने कांग्रेस शासन के 56 घोटालों को आधार बनाकर चुनाव लड़ा और सरकार बनाई। इन घोटालों की जांच के लिए गठित आयोगों पर करोड़ों रुपए खर्च हुए। तीन मुख्यमंत्रियों के साथ सत्ता में पांच साल पूरे करने वाली भाजपा ने कांग्रेस के कथित घोटालों पर कोई कदम नहीं उठाया।
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लेकिन विधानसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा ने राजनीतिक हथकंडा अपनाते हुए आयोग की कुछ मामलों की जांच विजिलेंस को दे दी। हालांकि, कभी ऐसा नहीं होता कि न्यायिक आयोग जिस मामले की जांच करे उसे फिर विजिलेंस को दिया जाए। आयोग की जांच रिपोर्ट के तत्काल बाद तो कानूनी कार्रवाई होती है। कुल मिलाकर भाजपा ने जनता को भ्रमित करने के अलावा कुछ नहीं किया।
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2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा शासन के सिटूर्जिया भूमि, हाइड्रो प्रोजेक्ट आवंटन, महाकुंभ 2010, ढैंचा बीज, 2010 की दैवी आपदा में गड़बड़ी को आधार बनाकर चुनाव लड़ा और सत्ता हासिल की। चुनाव में कहा था कि सत्ता में आए तो कार्रवाई करेंगे।
कांग्रेस की सत्ता के तीन साल पूरे हो चुके हैं लेकिन जांच रिपोर्ट के राजनीतिक इस्तेमाल के अलावा कुछ नहीं हुआ। कांग्रेस सरकार के रणनीतिकारों ने सियासत में शरारत की और लोकसभा चुनाव से पहले कुंभ की कथित गड़बड़ियों से संबंधित त्रिपाठी आयोग की रिपोर्ट लीक कर हरिद्वार सीट पर भाजपा के रमेश पोखरियाल निशंक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
डोईवाला के विस उपचुनाव से ठीक पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत को क्षति पहुंचाने के लिए ढैंचा बीज की जांच रिपोर्ट को मीडिया में लीक किया गया। लेकिन नतीजा अभी तक सिफर से आगे नहीं बढ़ा।
दोनों दल बना रहे बेवकूफ : हरक
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि घोटालों के बल पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। हरीश रावत कहते हैं कि पैकेज में सीबीआई जांच करा दूंगा, भाजपा वाले जवाबी हमले में सीबीआई जांच की चुनौती देते हैं।
इस नूरा कुश्ती से जनता का बेवकूफ बनाया जा रहा है। हरक ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री हरीश रावत से भी कहा है कि या तो भाजपा के घोटालों की जांच कराएं या फिर आरोप लगाना बंद करें और जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करें। मैंने यही बात विजय बहुगुणा से भी कही थी।
भाजपा भी कांग्रेस के 56 घोटालों के दम पर सत्ता में आई थी, जांच कराई लेकिन कार्रवाई का डर दिखाने में ही पांच साल निकाल दिए। दोनों ही दल जनता को भ्रमित कर रहे हैं।
गड़े मुर्दे उखाड़ने से कोई फायदा नहीं है। प्रजातंत्र में जनता सर्वोपरि है वही सबक सिखाएगी। यदि मेरे भाजपा के दोस्त बहुत कहेंगे तो उनकी सरकार के कार्यकलापों की सीबीआई जांच कराने की इच्छा भी पूरी कर दूंगा।
(विगत 22 जून को मुख्यमंत्री हरीश रावत का बयान)
अभी तक किसने क्या किया यह अतीत की बात है। मैं अतीत में नहीं जाना चाहता। लेकिन वर्तमान का सच यह है कि आज कांग्रेस सत्ता में है। इसलिए वह भाजपा और कांग्रेस शासनकाल के सभी मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दे, यह प्रस्ताव हम पहले भी दे चुके हैं। लेकिन बंदर घुड़की ना दे।
- अजय भट्ट, नेता प्रतिपक्ष