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फर्जी टैक्सी बिल सहित कई घोटाले स्वास्थ्य विभाग में
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 18 Feb 2016 04:21 PM IST
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उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों के घोटालों पर अभी तक जांच पूरी नहीं होने पर स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने तेवर तल्ख किए हैं। फर्जी टैक्सी ईंधन बिल के अलावा टिहरी और देहरादून में सीएमओ स्तर से संविदा पर हुई नियुक्तियों में गड़बड़ी के मामले की कई बार जांच तो हुई लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओमप्रकाश को इस मामले में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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फर्जी टैक्सी बिल मामले में स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी कठघरे में हैं। तीन बार हुई जांच में 1.75 करोड़ रुपये का घोटाला साबित भी हुआ। जांच में प्रदेश के आठ सीएमओ समेत कुल 16 अधिकारी दोषी करार दिए जा चुके हैं। अब शासन अपर सचिव रैंक के अधिकारी से नए सिरे से जांच करवा रहा है।
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वहीं टिहरी और देहरादून में बिना शासन की अनुमति के संविदाकर्मियों की नियुक्ति के मामले में भी जांच रिपोर्ट काफी पहले आ चुकी है। रिपोर्ट में दोनों जिलों के तत्कालीन सीएमओ को दोषी ठहराया गया है। हालांकि यह जांच रिपोर्ट लंबे समय से दबी हुई है। पूर्व डीजी हेल्थ डा. आरपी भट्ट ने लंबे समय तक यह जांच रिपोर्ट दबाकर रखी।
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हालांकि उन पर लगातार विभिन्न घोटालों की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का दबाव डाला गया, पर उन्होंने फाइल शासन को भेजने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस मामले में डॉ. भट्ट के सीएमओ पद पर रहने के दौरान की भी जांच की गई थी। जिसमें खुद वह भी सवालों के घेरे में थे।
स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले में कार्रवाई ना होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओमप्रकाश को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई ना होने के कारण सरकार की छवि धूमिल हो रही है।
जांच टीम ने सीएमओ दफ्तर में खंगाली फाइलें
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में बिना शासन की नियुक्ति के संविदा कर्मियों की नियुक्ति के मामले में जांच शुरू हो गई है। मामले में पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक डा. आरपी भट्ट आरोपी हैं। मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओमप्रकाश को मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
डा. आरपी भट्ट के वर्ष 2012-13 में मुख्य चिकित्साधिकारी रहने के दौरान संविदाकर्मियों की भर्ती हुई थी। भर्तियों से पहले डा. भट्ट ने शासन से अनुमति नहीं ली। हालांकि तब मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई और डा. आरपी भट्ट स्वास्थ्य महानिदेशक बन गए। अब उनके सेवानिवृत्त होने के बाद एक बार फिर नियुक्तियों में गड़बड़ी का जिन्न बोतल से बाहर निकल आया है।
मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री ने प्रमुख सचिव को इस मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। बुधवार को निदेशक स्वास्थ्य आभा ममगाई के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम सीएमओ कार्यालय पहुंची और जांच शुरू की। जांच टीम ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से मामले के संबंध में जानकारी जुटाई।
वहीं तत्कालीन पत्रावलियां भी निकलवाई जा रही है, ताकि पूरे मामले का सच सामने लाया जा सके। बताया जा रहा है कि प्रांरभिक जांच में नियुक्तियों की पुष्टि हुई है। डा. आभा ममगाई ने बताया कि मामले की जांच के बाद रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।