समाज कल्याण विभाग की योजनाओं में हुआ खेल, ऑडिट ने पकड़ी करोड़ों की गड़बड़ी
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हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर में समाज कल्याण विभाग की योजनाओं में करोड़ों की गड़बड़ी पकड़ में आई है। वित्त विभाग ने जब योजनाओं के लिए स्वीकृत धनराशि के इस्तेमाल का ऑडिट किया तो पता चला कि कहीं बगैर टेंडर के लाखों की खरीद की गई तो कहीं भवन निर्माण के लिए लाखों रुपये सालों तक विभाग दबाए रहा और बाद में वो धनराशि शासन को लौटा दी गई। जनजातीय छात्रों के अध्ययन के लिए बनाए गए आश्रम पद्धति के स्कूलों में अनुसूचित जाति के छात्रों को दाखिला दे दिया गया। इसके लिए शासन से अनुमति लेने की भी जरूरत महसूस नहीं की गई। ऑडिट ने इन सब को घोर वित्तीय अनियमितता माना है। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने समाज कल्याण विभाग को ऑडिट रिपोर्ट भेजकर इस पर कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।
बगैर टेंडर खरीदे कृत्रिम अंग
ऊधमसिंह नगर के जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय ने वर्ष 2017-18 के दौरान दिव्यांग कल्याण योजना के तहत 5.35 लाख रुपये के कृत्रिम अंग बिना टेंडर के खरीद लिए। कोटेशन के आधार पर मैसर्स हरिओम साइकिल मार्ट आगरा से ये खरीद कर अधिप्राप्ति नियमावली का उल्लंघन किया गया।
छह साल दबाए रखे 76.92 लाख
ऊधमसिंह नगर में विभाग ने डॉ. भीमराव आंबेडकर बहुउद्देश्यीय भवन निर्माण योजना की 76.92 लाख रुपये की धनराशि को छह साल तक दबाए रखा और बगैर इस्तेमाल किए उसे शासन को लौटा दिया। ऑडिट ने इसे घोर वित्तीय अनियमितता माना है।
खाते में अवरुद्ध रखे लाखों रुपये
ऑडिट में यह तथ्य भी पकड़ में आया कि एक योजना को शुरू नहीं किया जा सका और उसका 33.20 लाख रुपये चालू खाते में अवरुद्ध पड़ा था। अटल आवास योजना के तहत 3.52 लाख रुपये की धनराशि पात्र लाभार्थियों के खाते में भेजने के बजाय उसे बैंक खातों में रखा गया। विभिन्न योजनाओं का 78.01 लाख रुपये भी अनावश्यक कार्यालय स्तर पर बैंक खातों में अवरुद्ध रखा गया था।
मृतकों को भी बांट दी पेंशन
ऑडिट में यह अनियमितता भी उजागर हुई कि ऊधमसिंह जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में ऐसे लाभार्थियों को भी वृद्धावस्था पेंशन का भुगतान कर दिया गया, जो जीवित नहीं थे।
एसटी छात्रों के विद्यालय में एसी के छात्र
ऑडिट के दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय में यह गड़बड़ी भी पकड़ में आई कि सरकार ने अनुसूचित जनजाति के छात्रों के चकराता के पोखरी में जो आश्रम पद्धति के उच्च माध्यमिक बालिका विद्यालय बनाया था, उसमें अनुसूचित जाति के छात्रों को दाखिला दे दिया। इसके लिए शासन से अनुमति नहीं ली गई। ऑडिट ने माना कि उन पर 26.21 लाख रुपये का अनुचित व्यय किया गया है। ठीक ऐसा ही मामला कालसी और त्यूनी स्थित राजकीय आश्रम पद्धति के उच्च माध्यमिक स्कूलों का भी है, जहां क्रमश: 22.80 लाख और 27.79 लाख रुपये की धनराशि एससी छात्रों पर व्यय की गई, जबकि ये विद्यालय एसटी छात्रों के लिए बना है।
बगैर टेंडर के दिया भोजन का ठेका, बिजली पानी की कटौती भी नहीं
ऑडिट ने पाया कि ऊधम सिंह नगर में वर्ष 2017-18 के दौरान राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय विडौरा में मैसर्स मैट्रिक्स एनवायरमेंटल श्यामपुर को भोजन का ठेका बिना टेंडर प्रक्रिया के दे दिया गया। इसके एवज में उसे 49.34 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। लेकिन भोजन बनाने के लिए उसने स्कूल की बिजली और पानी का इस्तेमाल तोे किया, लेकिन भुगतान करते हुए इसकी कटौती नहीं की गई।
बिना स्वीकृति शिक्षकों की तैनाती, 92 लाख भुगतान
कालसी स्थित राजकीय आश्रम पद्धति के विद्यालय में वर्ष 2017-18 के ऑडिट में यह भी पकड़ में आया कि वहां बिना स्वीकृत पद के छह शिक्षक तैनात कर दिए गए, जिनके वेतन व अन्य मदों पर 92 लाख रुपये का अनियमित भुगतान हुआ। बिना निविदा के आरसी कंस्ट्रक्शन को भोजन आपूर्ति का ठेका दे दिया गया और उसको 33.68 लाख का अनियमित भुगतान हुआ।
ये अनियमितता भी पकड़ी
- रुद्रपुर आश्रम पद्धति के स्कूल के अनुसेवक को सातवें वेतन आयोग के तहत हुआ अधिक भुगतान।
- रुद्रपुर जनपद में 2008-09 से 2017-18 तक दिव्यांग लाभार्थियों को दुकान बनाने के लिए जो ऋण बांटा गया, उसकी 4.28 लाख की वसूली नहीं हुई।
- वृद्धजनों की योजनाओं का प्रचार प्रसार करने के लिए चार लाख की राशि खर्च नहीं की गई।
- आश्रम पद्धति के स्कूल लांगा पोखरी में पेयजल लाइन की मरस्मत पर 6.32 लाख खर्च किए, लेकिन कार्य पूरा नहीं हुआ।