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सरकारी विभागों के चालक भर्ती में घपला!
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 01 Feb 2015 01:51 PM IST
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उत्तराखंड के सरकारी विभागों में वाहन चालकों के 600 पदों पर हो रही भर्ती में बड़े घोटाले की गंध आ रही है।
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निजी कंपनी को दे दिया यह काम
दरअसल, परीक्षा आयोजक प्राविधिक शिक्षा परिषद ने चालकों की प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए बनने वाली चयन समिति से संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) को हटाकर यह काम एक निजी कंपनी को दे दिया है। कंपनी ने भी अपने बेहद निचले स्तर के दो कर्मचारियों को चालकों को चुनने की जिम्मेदारी दे दी है।
ऐसे में सवाल उठने लगा है कि कंपनी के निचले स्तर के कर्मचारी चालकों की नियुक्ति के लिए निर्धारित मानदंडों का निरीक्षण-परीक्षण कैसे करेंगे? क्या उन्हें इसकी जानकारी है? नियमानुसार यह कार्य संभागीय परिवहन अधिकारी को ही करना चाहिए।
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परिवहन विभाग ने भी प्राविधिक शिक्षा परिषद के निर्णय पर सवाल खड़ा किया है। सूत्रों का दावा है कि चहेतों की भर्ती करने के लिए और मोटी कमाई करने के लिए परिषद के स्तर पर फेरबदल किया गया है।
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मोटर ड्राइविंग स्कूल पर जिम्मा
पांच फरवरी से आयोजित होने वाली प्रयोगात्मक परीक्षा का दायित्व झाझरा स्थित इंस्टीट्यूट आफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (आईडीटीआर) मोटर ड्राइविंग स्कूल को दिया गया है।
नियमावली की अनदेखी
उत्तरांचल सरकारी विभाग चालक सेवा नियमावली 2003 में साफ उल्लेख है कि चालकों की चयन समिति में संभागीय परिवहन अधिकारी स्तर से कम का अधिकारी नहीं होना चाहिए। हालांकि, यह व्यवस्था भी दी गई है कि संभागीय परिवहन अधिकारी चाहें तो अपने स्थान पर सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी को समिति का सदस्य बना सकते हैं।
ऐसी होती है परीक्षा
सरकारी विभागों में चालकों की भर्ती प्रक्रिया में आवेदक को सौ अंकों की परीक्षा देनी होती है। इनमें से 25 अंक की लिखित परीक्षा होती है, जबकि बाकी 75 अंक प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए तय हैं। प्रयोगात्मक परीक्षा में चालक को समिति सदस्यों के सामने संबंधित श्रेणी (हल्के, भारी जिस श्रेणी में आवेदन किया हो) के वाहन चलाकर दिखाना होता है।
इसके अलावा चालक को यातायात नियमों की जानकारी की परख, स्वास्थ्य स्थिति, सड़क पर वाहन चलाने के तरीके आदि का भी परीक्षण किया जाता है।
संस्थान पहले से संदिग्ध
जिस संस्थान को जिम्मेदारी दी गई है, उस पर पहले भी फर्जी वाणिज्यिक लाइसेंस बनाने के मामले में सवाल उठते रहे हैं। करीब दो माह पूर्व परिवहन कार्यालय में 250 ऐसे लाइसेंस जारी होने का मामला सामने आया था, जिनमें आईटीडीआर के फर्जी प्रशिक्षण प्रमाणपत्र लगे थे। संबंधित चालकों ने संस्थान से प्रशिक्षण भी हासिल नहीं किया था। इस मामले की जांच डालनवाला पुलिस कर रही है।
परिवहन विभाग की चिंता
- दो मामूली कर्मचारी कैसे तय करेंगे नियमों का पालन
- प्रशिक्षित चालकों की भर्ती पर नहीं होगी सरकारी नजर
- चहेतों को बिना परीक्षण भर्ती किया तो कौन होगा जिम्मेदार
हमें नियमों के विपरीत चयन समिति से हटा दिया गया है। यह भी सुनने में आया है कि यह काम अब आईटीडीआर झाझरा में स्थित मारुति कंपनी को दिया गया है। यह निर्णय उत्तरांचल सरकारी विभाग चालक सेवा नियमावली के खिलाफ है। समिति में संभागीय परिवहन अधिकारी स्तर का अधिकारी ही हो सकता है।
- दिनेश चंद्र पठोई, संभागीय परिवहन अधिकारीं