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सहेजेंगे कैलाश मानसरोवर क्षेत्र के जलस्रोत
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 02 Jun 2016 11:00 AM IST
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छोटा कैलास
- फोटो : अमर उजाला
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कैलाश मानसरोवर परिक्षेत्र के विकास के मॉडलों को मंजूरी मिल गई है। सबसे अहम मॉडल जलस्रोतों के उद्गम स्थलों को सहेजने का है।
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माना जाता है कि हिमालयी क्षेत्र के जलस्रोतों का मूल उद्गम स्थल कैलाश परिक्षेत्र ही है। इससे यहां के जलस्रोतों के उद्गम स्थलों को खास बायो इंजीनियरिंग तकनीक से सहेजा जा रहा है। कैलाश भू-क्षेत्र की पुरातन जैव विविधता को भी संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए गांवों की जैव विविधता समितियों को जिम्मेदारी दी जा रही है।
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भारत, चीन और नेपाल संयुक्त रूप से कैलाश परिक्षेत्र के विकास की परियोजना पर कार्य कर रहे हैं। इस परियोजना में जुटे भारतीय संस्थानों ने अलग-अलग मॉडल तैयार करके दिए थे। प्रयोग में सफल रहने के बाद इन्हें मंजूरी मिल गई है। सरकार इन्हें लागू करने में सहयोग करेगी। मॉडलों को लागू करने का कार्य पिथौरागढ़ जिले से शुरू हो रहा है। भारत के लिए कैलाश भू-क्षेत्र सांस्कृतिक धरोहर तो है ही, इसके अलावा हिमालयी क्षेत्र के जलस्रोतों का केंद्र भी माना जाता है। सबसे अधिक ध्यान जलस्रोतों को सहेजने पर दिया जा रहा है।
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भारतीय वन्य जीव संस्थान, जीबी पंत इंस्टीट्यूट, वन विभाग और उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड ने मॉडल बनाकर दिए हैं। जल संरक्षण मॉडल में भूगर्भीय जलस्रोत सहेजने के साथ यहां छोटे-छोटे जलाशय भी बनाए जाएंगे। साथ ही जलाशयों के किनारे पुराणों में वर्णित पौधे लगाए जाएंगे ताकि जलस्रोत रिचार्ज होते रहें। कैलाश भू-क्षेत्र के इको सिस्टम के लिए भी मॉडल तैयार किया गया है। साथ ही यहां रहने वालों की आजीविका के साधन उपलब्ध कराने का मॉडल बना है। कैलाश परिक्षेत्र के गांवों की सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर सहेजी जाएगी। जिससे यहां आते ही लोगों को अंदाजा लग जाए कि वह परिक्षेत्र के किस हिस्से में पहुंच गए हैं।
कैलाश परिक्षेत्र के लिए तैयार किए गए मॉडलों को मंजूरी मिल गई है। 24 मई की बैठक में निर्णय ले लिया गया है। मॉडल पिथौरागढ़ जिले से लागू किए जा रहे हैं। कैलाश परिक्षेत्र का समग्रता में विकास किया जाएगा। नेपाल और चीन अपनी जरूरत के लिहाज से मॉडल तैयार कर रहे हैं।
- डॉ. रणवीर सिंह रावल, नोडल अधिकारी, परियोजना