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गुज्जरों के आगे बेबस है 'टाइगर' की गुर्राहट

Wed, 21 Aug 2013 04:45 PM IST
अमर उजाला, प्रेम प्रताप सिंह, देहरादून
अमर उजाला, प्रेम प्रताप सिंह, देहरादून Updated Wed, 21 Aug 2013 04:45 PM IST
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save tiger in uttarakhand

उत्तराखंड में बाघों के संरक्षण के लिए केवल धींगामुश्ती हो रही है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद कार्बेट टाइगर रिजर्व से गुज्जरों का विस्थापन नहीं हो पाया है।

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जबकि रिजर्व फारेस्ट के बाघों को बचाने के लिए फंड ही नहीं है। संरक्षण के नाम पर जंगलात महकमे से लेकर शासन के उच्चाधिकारी तक फाइलों को दबाने में माहिर हैं, जिसका नतीजा यह है कि हर साल प्रदेश में बड़ी संख्या में असमय ही बाघों की मौत हो रही है।
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सात करोड़ की मदद

कार्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों को बचाने के लिए बजट की कमी नहीं है। हर साल केंद्र की ओर से छह से सात करोड़ की मदद मिलती है, लेकिन कार्बेट के सोना नदी वन्यजीव विहार से गुज्जरों के विस्थापन के मामले को लगातार लटकाया जा रहा है।

इससे कार्बेट में बाघों का संरक्षण प्रभावित हो रहा है। हल्द्वानी, रामनगर, तराई वेस्ट, तराई ईस्ट, तराई सेंट्रल, अल्मोड़ा, नैनीताल, हरिद्वार और लैंसडौन वन प्रभाग में भी 70 से 80 बाघ हैं, लेकिन इनके संरक्षण पर अभी तक एक पाई खर्च नहीं की गई है।

बाघों को मौत की नींद

इन प्रभागों में न तो ठीक से पेट्रोलिंग होती है और न ही वन कर्मियों को इस काम के लिए कोई सुविधा दी गई है। इन क्षेत्रों में बाघों की सुरक्षा भगवान भरोसे है, जिसका नतीजा यह है कि आए दिन शिकारी रिजर्व फारेस्ट के बाघों को मौत की नींद सुला देते हैं।

बाघ बचाने के लिए बनाया गोला कारपस फंड
कुमाऊं मंडल के सात वन प्रभागों में बाघों को बचाने के लिए गोला कारपस फंड बनाया गया है। इसमें लगभग सात करोड़ की रकम एकत्रित की गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पिछले सप्ताह ही इस फंड को बनाया गया।

हालांकि अभी तक आदेश जारी नहीं हुए हैं। इस फंड से हल्द्वानी, रामनगर, तराई वेस्ट, तराई ईस्ट, तराई सेंट्रल, अल्मोड़ा और नैनीताल वन प्रभाग के बाघों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएंगे। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के अनुसार इस मद से कार्बेट की ही तरह पेट्रोलिंग से लेकर अन्य सुरक्षा के इंतजाम किये जाएंगे।


इनकी भी सुनिए
प्रदेश में बाघों का संरक्षण शून्य है। शासनादेश होने के महीनों बाद भी कार्बेट टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन नहीं हो पाया है। इससे अफसोस जनक स्थिति और क्या हो सकती है। इस मामले में जंगलात महकमे के अधिकारियों से लेकर शासन तक की आंखें बंद हैं।
-गौरी मौलेखी, सचिव उत्तराखंड पीएफए

रिजर्व फारेस्ट के बाघों के संरक्षण के लिए एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी) ने नौ करोड़ रुपये का बजट स्वीकृति किया है। पिछले साल 25 लाख मिले थे। सितंबर में कुछ और बजट जारी कर दिया जाएगा। जहां तक कार्बेट का सवाल है तो गुज्जरों के विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है।
- एसएस शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव

उत्तराखंड में तीन साल में मरे बाघ

वर्ष बाघों की संख्या
2013 10
2012 17
2011 24


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