फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   save girl child, story of chandni

बुजुर्ग माता-पिता के जीवन की चांदनी

Sun, 05 Jan 2014 10:10 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 05 Jan 2014 10:10 AM IST
विज्ञापन
save girl child, story of chandni

कॅरियर और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल में से एक चुनना पड़ा तो देहरादून की चांदनी पाहुजा ने माता-पिता की सेवा करने का फैसला किया।

विज्ञापन


सौ बेटों से बढ़कर है चांदनी
चांदनी ने जो किया वैसा शायद ही कोई बेटा कर पाता है। यही वजह है कि उनके पिता अमरजीत सिंह (68) गर्व से कहते हैं कि यह हमारे बुढ़ापे का सहारा है। जिस तरह हमारी सेवा करती है, वैसा कोई बेटा नहीं कर सकता। मेरी बेटी सौ बेटों से बढ़कर है।

पढ़ें, डीजे बजाया तो उलेमा ने जारी किया फतवा
विज्ञापन


रेसकोर्स वैली निवासी अमरजीत सिंह दो बेटियों के पिता हैं। बड़ी बेटी पूनम गुप्ता कुवैत में रहती हैं। छोटी बेटी चांदनी गढ़वाल विश्वविद्यालय से प्राइवेट बीए करने के बाद वर्ष 1996 में मुंबई चली गई। सपना था बतौर कोरियोग्राफर बालीवुड में छाने का।
विज्ञापन
विज्ञापन


पढ़ें, 31 साल बाद बन रहा ऐसा योग, जानिए क्या है खास

मुंबई में नृत्य सीखने और पांच-छह साल संघर्ष करने के बाद चांदनी को कोरियोग्राफी के मौके मिलने लगे। लेकिन इसी बीच वर्ष 2009 में उन्हें खबर मिली कि पिता की तबीयत बेहद खराब है। घर में कोई देखने वाला था नहीं।

करियर छोड़ा

मां जोगेंद्र कौर (63) भी बुजुर्ग हैं। ऐसे में चांदनी के सामने कॅरियर या माता-पिता की देखभाल का सवाल खड़ा हो गया। चांदनी बताती हैं कि माता-पिता ने कभी उनके बेटी होने के कारण प्यार-दुलार में कोई कमी नहीं की।


पढ़ें, उत्तराखंड के इस गांव में आपदा ने डाला डेरा

लिहाजा करियर छोड़कर उनके बुढ़ापे की लाठी बनने का फैसला लेने में वक्त नहीं लगा। चांदनी मुंबई से घर लौट आईंऔर फिल्मों में कोरियोग्राफर बनने का अरमान वहीं छोड़ दिया। घर पहुंची तो पिता की देखरेख और मां की मदद ही उनका मकसद बन गया।

पढ़ें, राजधानी देहरादून में आप को मिला गया 'शिकार'

हृदयरोगी पिता की सेहत में सुधार के बाद चांदनी ने एक डांस इंस्टीट्यूट शुरू किया। यहां वे बच्चों को साल्सा, बालीवुड और जूंबा डांस सिखाती हैं। चांदनी कहती हैं कि उन्हें कॅरियर का मलाल नहीं, माता-पिता की सेवा कर संतुष्टि मिलती है।

माता-पिता के लिए नहीं की शादी
39 की उम्र पार कर चुकी चांदनी ने माता-पिता की सेवा के लिए शादी न करने का फैसला किया हैं। बताती हैं कि रिश्ते आते हैं, लेकिन मना कर देती हूं। डर लगता है कि शादी के बाद पति ने माता-पिता का ख्याल नहीं रखा तो क्या होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed