सत्यपाल ने आसान की बहू की राह, छोड़ा मैदान
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भगवानपुर उपचुनाव में दिवंगत कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश की पत्नी ममता राकेश को टिकट दिए जाने से नाराज होकर निर्दलीय पर्चा भरने वाले कांग्रेस नेता मास्टर सत्यपाल आखिरकार मान गए। पार्टी और परिवार के दबाव में सत्यपाल ने बहू के लिए मैदान छोड़ दिया है।
उल्लेखनीय है कि सत्यपाल दिवगंत सुरेंद्र राकेश के चाचा हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा से सुरेंद्र राकेश के खिलाफ सत्यपाल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे और इस बार भी प्रबल दावेदार थे। सत्यपाल के बैठ जाने के बाद पार्टी ने राहत की सांस ली है।
सत्यपाल को मनाने के लिए पार्टी नेताओं के साथ परिवार के लोग भी जुटे थे। रिश्तेदारों का तर्क था कि सत्यपाल के मैदान में डटे रहने से दोनों ही परिवारों को राजनैतिक नुकसान होता। बताते हैं कि मान मनौव्वल में रिश्तेदारों ने भी अहम भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री के बेटे का मनाना कर गया काम
मुख्यमंत्री के बेटे और पार्टी महासचिव आनंद रावत के साथ कांग्रेस के स्थानीय नेता सत्यपाल को मनाने के लिए लगाए गए थे।
कांग्रेस को बृहस्पतिवार रात ही सफलता मिल गई थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने मीडिया से कहा कि सत्यपाल के राजनैतिक भविष्य की रक्षा हमारा कर्तव्य है।
नामांकन वापसी के तैयार होने पर शुक्रवार को कांग्रेस नेता उनके साथ बाकायदा कलेक्ट्रेट पहुंचे। सुबह 11:30 बजे सत्यपाल पार्टी नेताओं आनंद रावत, जोतसिंह बिष्ट, राव आफाक अली आदि के साथ रोशनाबाद कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपना नामांकन वापस ले लिया। एक अन्य प्रत्याशी मनोज कुमार ने भी पर्चा वापस लिया। अब छह प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं।