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सरवत के स्टिंग की असलियत जांचेगी विधानसभा

Mon, 24 Nov 2014 09:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 24 Nov 2014 09:21 PM IST
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sarwat karim ansari sting operation and vidhan sabha session

उत्तराखंड में बसपा विधायक सरवत करीम अंसारी पर स्टिंग ऑपरेशन में लगे आरोपों की जांच विधानसभा करेगी। विधानसभा सत्र के पहले दिन भाजपा ने बसपा विधायक के स्टिंग ऑपरेशन को लेकर जमकर हंगामा किया जिसके चलते सदन की कार्यवाही पहले सत्र में चार बार स्थगित करनी पड़ी।

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दोपहर बाद नियम-58 के तहत विधायक के मामले पर चर्चा कराई गई। जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने अपनी व्यवस्था में जांच कराने की बात कही। अध्यक्ष ने कहा कि जांच जल्द पूरी कर रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाएगी। जानकारी के मुताबिक जांच में सभी दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।  
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रविवार को खबरिया चैनल पर दिखाए गए स्टिंग ऑपरेशन के बाद सोमवार 11:00 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो भाजपा विधायक अपने-अपने स्थान पर खड़े हो गए और विरोध जताने लगे।  सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग कर  भाजपा विधायक वेल में आ डटे। कार्यवाही शुरू हुए दस मिनट ही हुए थे कि अध्यक्ष ने सदन को 11:30 बजे तक स्थगित कर दिया।
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इसके बाद तीन बार सदन शुरू करने की कोशिश हुई लेकिन हंगामे के चलते स्थगित करना पड़ा। प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया। भाजपा नेताओं को पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत और फिर विधानसभा अध्यक्ष के साथ हुई बैठक में कुछ बात बनी और दोपहर बाद तीन बजे कार्यवाही शुरू हुई।

दूसरों के नाम भी आएंगेः अंसारी

sarwat karim ansari sting operation and vidhan sabha session

विधानसभा अध्यक्ष ने नियम का हवाला देकर सदन में मौजूद आरोपी विधायक सरवत करीम अंसारी को भी बोलने का मौका दिया। विधायक ने सदन में कहा कि मैं सीबीआई जांच के लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा मुझे बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
अभी तो मेरा ही नाम खोला है दूसरों के नाम भी आएंगे।

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि मैं खुद इस्तीफा देने को तैयार हूं अगर मैं दोषी पाया जाता हूं तो आप पदमुक्त कर दें। लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि भविष्य में हमारे और भी साथी ऐसे ही शिकार होंगे। सरवत ने अपने बयान की समाप्ति एक शायरी से की तो भाजपा विधायक संजय गुप्ता उखड़ गए और गंभीर मुद्दे पर शेरो-शायरी पर आपत्ति जताई।

नेता प्रतिपक्ष इस बात अड़े गए कि जिस नियम के तहत विधायक को बोलने की अनुमति दी है उसके तहत जब जांच नहीं हो जाती उन्हें सदन से बाहर रहना होगा। इस पर मंत्री इंदिरा ह्दयेश खड़ी हुई और भाजपा से नई परंपरा न डालने को कहा। उन्होंने कहा कि सदन के सदस्य को अपनी बात कहने का अधिकार है जो विधानसभा अध्यक्ष ने दिया है।

बात बढ़ती देख नेता सदन हरीश रावत खडे़ हुए उन्होंने कहा कि आप जांच चाह रहे थे खुद विधायक भी यही कह रहे हैं। आप चाहते हैं दोषी पाए जाने पर वे पद त्याग दें वे खुद इस बात को कह रहे हैं लेकिन उनकी इस बात पर भी गौर करना होगा कि आगे किसी अन्य सदस्य के साथ भी ऐसा होता है तो क्या करेंगे। क्योंकि न्यूज चैनल के संज्ञान से प्रत्येक व्यक्ति को बाहर तो नहीं किया जा सकता।

सदन की कार्यवाही ग्यारह बजे शुरू हुई। भाजपा ने स्टिंग ऑपरेशन को कलंक बता उच्च स्तरीय जांच की मांग की। हंगामा शुरू हुआ तो स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि सदन मीडिया का खबरों का संज्ञान नहीं लेता, यदि आपके (नेता प्रतिपक्ष) के पास कोई साक्ष्य है तो मेरे कार्यालय में आकर दे दो, उचित कार्रवाई होगी।

मामला गंभीर और संवेदनशील है। किसी इलेक्ट्रानिक मीडिया की ओर से जनप्रतिनिधि पर लगे कथित आरोप सदन की गरिमा को चुनौती है। प्रकरण की जांच की जाए ताकि वास्तविकता और नैसर्गिक न्याय के तहत आरोपी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।
-गोविंद सिंह कुंजवाल, विधानसभा अध्यक्ष

दोबारा वीडियो फूटेज और आवाज को सुन लें : सीएम

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कैबिनेट दर्जाधारी बसपा विधायक सरबत करीम अंसारी के स्टिंग आपरेशन के बाद विपक्ष के उनको सरकार के बाहर करने और जांच की मांग पर सीएम हरीश रावत ने विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के पाले में गेंद डाल दी।

सीएम ने अंसारी के स्टिंग आपरेशन का वीडियो फूटेज दोबारा देखने की सलाह भी दी है। इस सलाह से जहां वीडियो फूटेज पर सवाल खड़े हुए वहीं सीएम ने संकेत दे दिया कि अंसारी सरकार के साथ बने रहेंगे।

विधानसभा सदन में हंगामे के बाद विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के कक्ष में सीएम, नेता विपक्ष, पीडीएफ सहित भाजपा के कुछ विधायकों के साथ लंबे मंथन के बाद सीएम हरीश रावत मीडिया ने मीडिया से बातचीत की। सीएम ने कहा कि विपक्ष ने एक बड़ा मुद्दा सदन के समक्ष उठाया है जो सदन के संज्ञान में है।

हम केवल इतना ही कह सकते हैं कि जो इस मसले में अध्यक्ष का निर्णय होगा वही अंतिम रहेगा। उन्होंने मीडिया को सलाह दी कि किसी भी मुद्दे को उठाना मीडिया का अधिकार है, लेकिन किसी भी मुद्दे को निष्कर्ष केतौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए।

इससे कभी कभी लोगों के बरसों के जीवन की मेहनत पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब मसला विधानसभा अध्यक्ष के संज्ञान में है तो मेरा कुछ कहना उचित नहीं है। सीएम ने कहा कि फूटेज और आवाज को दोबारा सुने।  अंसरी के स्टिंग के वीडियो को दोबारा देखने की सलाह पर उसकी सत्यतता पर पूछे सवाल पर यह अविश्वास की स्थिति की बात नहीं है बस एक बार सारी फूटेज को देख लें। यह कहना कोई गलत तो नहीं है।

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