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बदली परंपरा, 14 साल बाद दिन में हुई संधि पूजा
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 13 Oct 2013 12:29 PM IST
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14 साल बाद ऐसा संयोग बना कि बंगाली समाज की ओर से की जाने वाली देवी की संधि पूजा रात की जगह दोपहर में हुई।
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दरअसल, यह पूजा हमेशा अष्टमी और नवमी के मिलन पर होती है और यह मिलन रात में ही होता रहा है। इस बार यह मिलन दिन में हुआ। अष्टमी के मौके पर यह पूजा 3 बजकर 48 मिनट पर हुई।
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40 मिनट की संधि पूजा
उल्लेखनीय है कि दुर्गापूजा के समय महाष्टमी के दिन 40 मिनट की संधि पूजा विशेष रूप से की जाती है। माना जाता है कि इस समय देवी ने महिषासुर का वध किया था। इस समय देवी चंडी का आह्वान किया जाता है।
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नवरात्र के दौरान की जाने वाली यह अष्टमी पूजा अपने आप में सबसे विशेष पूजा मानी जाती है। बंगाली लाइब्रेरी में दुर्गा पूजा कर रहे पंडित कमला प्रसाद मुखर्जी ने बताया कि यह 40 मिनट की पूजा बेहद खास होती है।
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बताया कि वर्ष 1999 में दोपहर के समय ऐसा संयोग बना था और संधि पूजा हुई थी उसके बाद इस साल ऐसा संयोग बना है। वहीं, बंगाली लाइब्रेरी में सीएम विजय बहुगुणा ने भी परिवार सहित पहुंचकर पूजा अर्चना की।
छाऊ नृत्य किया प्रस्तुत
शनिवार को बंगाली लाइब्रेरी में हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान ‘छाऊ-नृत्य’ प्रस्तुत किया गया। पुरोलिया, वेस्ट बंगाल से आए कलाकारों ने मुखौटों से देवी के अलग-अलग रूपों का वर्णन किया।
पूजा समिति के अध्यक्ष राजीव दत्ता ने बताया कि अष्टमी पर देवी को पेठे की बलि दी गई। बताया कि नवमी पर पंडाल में कन्या पूजन किया जाएगा। इस दौरान विशेष रूप से खीर का प्रसाद तैयार किया जाएगा।
दुर्गाबाड़ी में महाष्टमी पूजन किया गया। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। रायपुर, करनपुर, कांवली रोड, आराघर आदि जगहों पर पूजन किया गया।
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501 दीयों से की आरती
दून घाटी मां दुर्गा सेवा समिति की ओर से कालिंदी एनक्लेव में आयोजित की जा रही दुर्गा पूजा के आठवें दिन 501 दीयों से मां की आरती की गई। इस मौके पर बंगाल से आए पंडित सचिदानंद और कार्तिक मिश्रा ने मंत्रोच्चारण से पूजन कराया तो ढाकियों की धुन लगातार जारी रही।