फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Sal seeds will bring prosperity a new chapter in forest produce Uttarakhand news in hindi

Uttarakhand: साल के बीज लाएंगे समृद्धि, वनोपज में जुड़ा नया अध्याय, चॉकलेट और कई गुणकारी औषधियां हैं बनती

Mon, 26 Jun 2023 09:29 AM IST
रेनू सकलानी विनोद मुसान, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 26 Jun 2023 09:29 AM IST
सार

उत्तराखंड में पहली बार साल के बीज एकत्रित किए जा रहे हैं। साल के बीज से चॉकलेट और कई गुणकारी औषधियां बनती है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है।

विज्ञापन
Sal seeds will bring prosperity a new chapter in forest produce Uttarakhand news in hindi
चॉकलेट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रदेश में करीब पांच हजार वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले साल के जंगल ग्रामीणों और वन विभाग की आय का नया जरिया बनेंगे। प्रदेश में पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर साल के बीजों को इकट्टा कर बाजार में बेचने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस तरह से वन बाहुल्य प्रदेश उत्तराखंड में वनोपज का नया अध्याय जुड़ गया है।

विज्ञापन

प्रदेश में धामी सरकार का जोर वनाें से आय बढ़ाने पर है। इसके लिए इको टूरिज्म के अलावा वनों से मिलने वाली विभिन्न प्रकार की उपज से कैसे समृद्धि लाई जा सकती है, इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। इसी कड़ी में वन विभाग ने साल के बीजों से आय जुटाने की इस योजना पर पहली बार काम शुरू किया है।

विज्ञापन


एक अनुमान के अनुसार उत्तराखंड में करीब 45 लाख कुंतल साल के बीजों का उत्पादन होता है। हालांकि इस योजना में सभी बीजों को इकट्ठा नहीं किया जाएगा, बल्कि इसके लिए फायर लाइन और सड़कों के किनारे गिरे बीजों को इकट्ठा किया जाएगा। इस हिसाब से भी लाखों कुंतल बीज इकट्ठा हो जाएंगे। वन विभाग की ओर से पहली बार बीजों को एकत्रित किया जा रहा है, कितने बीज एकत्र किए गए हैं, इसका आंकड़ा आना अभी बाकी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

इस काम के लिए होता है साल के बीजों का इस्तेमाल

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में हजारों वर्षों से पित्त, ल्यूकोरिया, गोनोरिया, त्वचा रोग, पेट संबंधी विकार, अल्सार, घाव, दस्त और कमजोरी के इलाज में साल के बीज का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा चॉकलेट बनाने में भी साल के बीजों का प्रयोग किया जाता है।

इससे निकलने वाले तेल का नहीं है कोई तोड़

साल के बीजों से बहुमूल्य खाद्य तेल निकाला जाता है। बीज में 19-20 प्रतिशत तेल होता है। तेल का उपयोग मक्खन के विकल्प के रूप में और मिष्ठान्न और खाद्य पदार्थों में भी किया जाता है। तेल निकालने के बाद बची खली में 10-12 प्रतिशत प्रोटीन होता है। इसका उपयोग मुर्गियों के लिए चारे के रूप में किया जाता है।

कई राज्यों में बहुत पहले से किया जा रहा है इनका प्रयोग

देश में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड ऐसे राज्य हैं, जहां बड़े पैमाने पर साल के बीजों को प्रमुख वनोपज के तौर पर लघु वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से इकट्ठा करवाया जाता है। इन राज्यों में साल के बीजों का हर साल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी जारी किया जाता है।

ये भी पढ़ें...Uttarkashi: बवाल के बाद पुरोला में मुस्लिम समुदाय की 22 दुकानें खुलीं, लौटे दस परिवारों की जुबानी पूरी कहानी

उत्तराखंड में पहली बार पायलट प्रोजेक्ट के रूप में साल के बीजों को वनोपज के रूप में इकट्ठा किया जा रहा है। हालांकि इस बार बारिश के चलते बीजों को एकत्र किए जाने का अधिक समय नहीं मिल पाया। इस काम में इस बार केवल वन कर्मियों को ही लगाया गया था। कितने बीज इकट्ठा हुए हैं, डिविजनों से आंकड़ें आने बाकी हैं। अगले साल से वृहद स्तर पर इस योजना पर काम किया जाएगा। - मनोज चंद्रन, मुख्य वन संरक्षक, वन विभाग

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed