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जानिए, विकास की बातें करने वाले बहुगुणा के गांव हाल
बुघाणी गांव से गंगा असनोड़ा थपलियाल
Updated Sun, 27 Apr 2014 03:57 PM IST
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बड़े लोगों के बड़े होने की वजह भी होती है। टिहरी संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी साकेत के दादा स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा को यूं ही नहीं हिमालयपुत्र कहा जाता है।
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1972 हेमवती नंदन लाए थे बिजली
हेमवती नंदन बहुगुणा अपने गांव बुघाणी में 1972 तब बिजली लाए थे जब कई शहरी इलाके अंधेरे में थे। अपने घर के ही निचले हिस्से में आयुर्वेद चिकित्सालय और पोस्टआफिस शुरू कराया था।
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कभी 80 परिवारों वाला गांव लगभग वीरान और बदहाल है। सिर्फ 22 परिवार यहां रहते हैं। कभी वीआईपी गांव में शुमार बुघाणी के बाशिंदों के दिलों में हिमालय सी पीर है और हिमालयपुत्र की यादें।
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हिमालय पुत्र के प्रति अनुराग के चलते ही उनकी शिकायतें पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और बेटे साकेत के प्रति कम हो जाती हैं। ग्रामीण इतना जरूर कहते हैं कि उन्हें गांव की ओर देखना चाहिए, आखिर उनके पुरखों ने जिया है इस माटी को।
बुघाणी की बस 12 बजे जाने वाली बस छूट गई मैं फोटो पत्रकार सत्यप्रसाद मैठाणी के साथ अपने वाहन से ही निकल पड़ी। श्रीनगर-बुघाणी-खिर्सू मार्ग कई स्थान पर 2010 में हुई अतिवृष्टि के चलते खस्ताहाल है।
समस्याओं ने स्वागत किया
जगह-जगह सड़क के पुश्ते टूटे हैं। कई भूस्खलन जोन गवाही दे रहे थे कि मामूली बारिश में भी यहां का रास्ता बंद हो जाता है। घुमावदार चढ़ाई चढ़कर गांव पहुंचे तो समस्याओं ने स्वागत किया।
बुघाणी, मुंदोली, गैरू, नौली, अखाड़ा, भैंसकोट से मिलकर बनी ग्राम सभा कई समस्याओं से ग्रस्त है। बुघाणी गांव में वर्षों से पीने के पानी की किल्लत है।
हैंडपंपों से लाल पानी निकलता है। ग्रामीण इसे ही मवेशियों के लिए प्रयोग कर रहे हैं। एक ही हैंडपंप ऐसा है जिससे साफ पानी आता है, उसी से सारा गांव पानी पी रहा है। चिकित्सालय में एकमात्र फार्मेसिस्ट और वार्ड ब्वाय तैनात हैं।
गांव में सिर्फ एक बुजुर्ग मिले। 80 वर्षीय ध्रुव चंद्र बहुगुणा। स्व. बहुगुणा के आने पर गांव में होने वाली रौनक को याद करते हैं और फिर अचानक गुस्सा जाते हैं।
कहते हैं अब संग्रहालय बना रहे हैं जब गांव में कोई नहीं रहा। हेमवती तो पूरे पहाड़ का रखवाला था। अब हमारा और गांव का कोई रखवाला नहीं रहा।
साकेत कुछ समय पहले आए थे
विवाह के कुछ साल बाद पति को खो चुकी पवित्रा गौनियाल करीब 30 वर्षों से मायके में है। मायके वालों की मदद तथा आंगनबाड़ी में पढ़ाकर अपनी दोनों बेटियों को ब्याह चुकी है।
कहती हैं कि साकेत कुछ समय पहले आए थे। अब संग्रहालय बन रहा है तो शायद फिर आएंगे। बीना देवी, भगवान देवी तथा सोना देवी कहती हैं कि उनकी समस्याएं कोई नहीं सुनता। उन्हें तो जीवन भोगना भर है।
55 वर्षीय सुभाष बहुगुणा कहते हैं कि बहुगुणा जी गांव में 1972 में बिजली ला चुके थे। आज लो वोल्टेज के चलते बल्ब दीये सरीखे जलते हैं। तीन माह से रसोई गैस नहीं आई।
छह मजदूरों के सहारे चल रहा संग्रहालय का निर्माण
हेमवती नंदन बहुगुणा जयंती पर दो वर्ष पूर्व हुई उनकी याद में संग्रहालय बनाने की घोषणा की गई थी। कुल जमा छह मजदूर इस काम में लगे हैं। इसी से काम की सुस्त रफ्तारी का पता लगता है।