धर्मनगरी से भी राम मंदिर के लिए बनने लगा माहौल, संतों ने आरपार की लड़ाई का बना लिया है मन
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वर्ष 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने से पहले कार सेवा के निर्णय में अहम भूमिका निभाने वाली धर्मनगरी हरिद्वार से अब राम मंदिर निर्माण के लिए भी माहौल बनने लगा है।
लंबे अर्से से राजनीतिक मुद्दा बनते आ रहे राममंदिर के निर्माण के लिए संतों ने अब आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है। कई राजनेताओं के भी संतों की भावनाओं के अनुरूप बयान देने से राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनता दिखाई दे रहा है।
निवर्तमान शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद की छह दिसंबर से आमरण अनशन की घोषणा के बाद इस मुद्दे को और हवा मिली है। वहीं, आज होने वाली धर्मसभा में शामिल होने हरिद्वार से भी बड़ी संख्या में संत अयोध्या रवाना हुए हैं।
देश की अध्यात्मिक राजधानी कही जाती है हरिद्वार
हरिद्वार को देश की अध्यात्मिक राजधानी भी कहा जाता है। वर्ष 1992 में जब कार सेवा कर हिंदू धर्मावलंबियों ने अयोध्या में विवादित ढांचा को गिरा दिया था, उससे पहले हरिद्वार में भी कई बैठकें हुईं।
इनमें कार सेवा के निर्णय को सिरे चढ़ाया गया था। अब, जबकि लोकसभा चुनाव 2019 करीब है तो एक बार फिर से राम मंदिर निर्माण का मुद्दा जोर पकड़ने लगा है। यहां के कई संत राम मंदिर निर्माण की मांग करते हुए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने में जुट गए हैं।
कहा तो यहां तक जा रहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट के स्तर से फैसले में देरी की जा रही है तो केंद्र सरकार संसद में कानून बनाकर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त करे। यही नहीं नेता भी संतों की हां में हां मिलाते हुए जल्द राम मंदिर निर्माण की मांग उठा रहे हैं।
उमा भारती ने दावा किया कि राम मंदिर हर हाल में बनकर रहेगा
इसी का असर है कि राम मंदिर निर्माण का मुद्दा तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। संत अपने अनुयायियों को भी लामबंद करने में जुटे हैं। अगले साल जनवरी में प्रयागराज में लगने वाले कुंभ मेले में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की बात कही जा रही है।
निवर्तमान शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद पहले ही छह दिसंबर के बाद राम मंदिर के निर्माण की मांग के समर्थन में हरकी पैड़ी पर आंदोलन और स्वामी कैलाशनंद ब्रह्मचारी अयोध्या कूच करने का एलान कर चुके हैं।
संतों के दबाव का ही असर है कि बृहस्पतिवार को हरिद्वार आईं केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने दावा किया कि राम मंदिर हर हाल में बनकर रहेगा। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पिछले दिनों हरिद्वार में कह चुके हैं कि राम मंदिर के निर्माण का रास्ता जल्द निकलेगा।
राम मंदिर पूरी तरह आस्था का मुद्दा
राम मंदिर पूरी तरह आस्था का मुद्दा है। सरकार को इसमें देरी नहीं करनी चाहिए। संसद में कानून बनाकर सरकार को राम मंदिर का निर्माण कराना चाहिए। छह दिसंबर तक राम मंदिर पर ऐसा नहीं किया गया तो संत बड़ी संख्या में अयोध्या कूच करेंगे।
-महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी
राममंदिर अयोध्या में ही बनना चाहिए। राम सभी की आस्था के केंद्र बिंदु हैं, लेकिन इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना जाना। जबकि, भाजपा राम को केवल राजनीतिक मुद्दा बनाकर रखना चाहती है।
- ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, उपाध्यक्ष भारत साधु समाज
केंद्र सरकार को राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करते हुए अध्यादेश लाना चाहिए, जिससे भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण हो सके।
- फलाहारी बाबा सीतारमण दास
राम मंदिर निर्माण में पहले ही बहुत देर हो चुकी है। अब इसमें और देर नहीं करनी चाहिए। जिस तरह से देश में माहौल बन रहा है, जल्दी ही राम मंदिर बनने की उम्मीद है। सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
- जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य