गंगा के लिए 118 दिनों से अनशनरत संत गोपालदास आहत, पत्र में लिखा 'मैं फुटबॉल नहीं हूं'
गंगा के लिए 118 दिनों से अनशनरत संत गोपालदास ने प्रशासन की कार्रवाई से आहत होकर मुख्य न्यायाधीश के नाम पत्र जारी कर लिखा कि मैं फुटबाल नहीं हूं जो मुझे एक जगह से दूसरी जगह धकेला जा रहा है।
अन्य लोगों की भांति उनका भी जीवन के प्रति अपना अधिकार है। वहीं संत गोपालदास ने एम्स प्रबंधन पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।
बृहस्पतिवार को संत गोपालदास को एम्स ऋषिकेश से चंडीगढ़ रेफर किया जा रहा था। इस दौरान संत गोपालदास ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम पत्र जारी कर न्याय दिलाने की मांग की। उन्होंने लिखा कि प्रशासन की टीम ने पहले उन्हें बदरीनाथ, चमोली, श्रीनगर और ऋषिकेश से जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया।
स्वाथ्स्य उपचार के बजाय मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया
मातृसदन आने पर 12 अक्तूबर देर रात ही एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया। 16 अक्तूबर को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद प्रशासन की टीम मुझे मातृसदन छोड़ कर गई, लेकिन 17 अक्तूबर को फिर से उठाकर एम्स में भर्ती करा दिया गया।
अब डाक्टर चंडीगढ़ रेफर कर रहे हैं। संता गोपालदास ने लिखा कि उन्होंने कई बार लिखित में एलोपैथी चिकित्सा न देने की मांग की है, जिसके बावजूद उन्हें उपचार के लिए बाध्य किया जा रहा है। उन्होंने एम्स प्रशासन पर स्वाथ्स्य उपचार के बजाय मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।