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सजा दिलाने के लिए इन्होंने ये सब भी सहा

Mon, 25 Nov 2013 10:28 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 25 Nov 2013 10:28 AM IST
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sahiye nahi, saza dilaiye

देहरादून में अमर उजाला अभियान ‘सहिए नहीं, सजा दिलाइए...’ के जवाब में कई पाठक सामने आए।

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पढ़ें, अपर सचिव यौन शोषण प्रकरणः पीड़िता को जान का खतरा

इस सिलसिले में रविवार को कई लोगों ने फोन किया। कई उत्पीड़ितों ने मामले को सामने रखा। कहीं विभागीय कमेटी की ओर से उन्हें निराशा हाथ लगी है तो कहीं पुलिस कार्रवाई सिफर रही।
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परिजनों की नाराजगी की परवाह नहीं की
कुछ मामले ऐसे थे, जिनमें युवतियों ने परिजनों की नाराजगी की परवाह न करते हुए आगे आने की हिम्मत दिखाई। इस तरह के दो केसों को प्रॉक्सी के तौर पर यहां दिया जा रहा है।
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पढ़ें, रिटायरमेंट के बाद किसी 'काम' के नहीं सचिन तेंदुलकर

इस तरह की व्यथा कई युवतियों और महिलाओं की हो सकती है, जिस पर एक्सपर्ट ने अपनी ओर से समाधान सुझाया। यह अभियान जारी रहेगा। आइए मिलकर आवाज उठाएं, पीड़ितों को न्याय दिलाएं।

मामले की हकीकत नहीं चल रही पता
11 मार्च को एक पार्षद के भाई पर क्षेत्र की एक युवती ने छेड़खानी करने और इस संबंध में मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था।

18 मार्च को मामले की एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद मामला कोर्ट में पहुंचा, लेकिन एक पेशी के बाद से क्या हुआ? न युवती को पता है, न परिजनों को।

उत्पीड़ित की बहन का कहना है कि पुलिस से पूछते हैं तो वह मामला कोर्ट से ही सुलझने की बात कहती है। उधर, वकील कहता है कि कार्रवाई चल रही है। हकीकत क्या है? मामला कहां है? हो क्या रहा है? कुछ समझ नहीं आ रहा।

एक्सपर्ट समाधान
अगर वकील के स्तर पर लापरवाही लग रही है तो वकील को बदला जा सकता है। इसके अलावा यह साफ नहीं कि आरोपी कहां हैं, उन पर चार्ज फ्रेम हुए होंगे।

देखना होगा कि यह स्थिति क्या है। उत्पीड़ित एसएसपी को अर्जी देकर भी ताजा हालात पता कर सकती हैं।

वूमेन प्रोटेक्शन में भी खानापूर्ति
राज्य के एक निगम की एक महिला कर्मी का कार्यस्थल पर उत्पीड़न हो रहा था। उसके वरिष्ठ उस पर तरह-तरह के कमेंट कर उसका जीना मुश्किल किए थे। महिला कर्मी ने परेशान होकर अपने वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कुछ नतीजा नहीं निकला।

उसने अपनी व्यथा वूमेन प्रोटेक्शन में लिखकर भेजी, जिस पर देरी से विभागीय कमेटी बैठी। मामले की सुनवाई शुरू हुई, लेकिन महिला कर्मी को शामिल नहीं किया गया।

उसका आरोप था कि कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूरी हो रही है। कमेटी में शामिल महिला वरिष्ठ अधिकारियों की पैरवी कर रही है, उसकी नहीं सुन रही।

एक्सपर्ट समाधान
अगर विभागीय कमेटी में महिला की नहीं सुनी जा रही तो वह अपनी शिकायत लेकर पुलिस अधिकारियों के पास जा सकती हैं। अदालत में भी अर्जी लगा सकती हैं। ऐसे मामलों में वकीलों को भी फीस को लेकर थोड़ी सदाशयता बरतनी होगी।


...तो दे दो मौत की सजा
अगर किसी व्यक्ति पर यौन उत्पीड़न का दोष सिद्ध हो जाए तो उसे मौत की सजा मिलनी चाहिए। उत्पीड़न एक युवती या महिला के लिए कई बार मरने जैसा होता है। हां, इससे पहले मामले की सुनवाई गंभीरता से की जानी चाहिए।
- योगेश, व्यवसायी, पलटन बाजार

यौन उत्पीड़न के हर मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट की तर्ज पर कार्रवाई होनी चाहिए। न्याय के स्तर कम होने चाहिए। जांच के बाद पहली निर्धारित तारीख पर ही अंतिम फैसला हो जाना चाहिए। सजा कड़ी-से-कड़ी तजवीज की जाए।
- महेश अरोड़ा, व्यवसायी, डांडीपुर मोहल्ला

कब सक्रिय होगी जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटी...
हेमवती नंदन बहुगुणा यूनिवर्सिटी का सबसे बड़ा कॉलेज है डीएवी पीजी। यहां आए दिन छात्राओं के साथ छेड़खानी और उसकी वजह से मारपीट होती हैं। हाल में ही छेड़खानी की कई घटनाएं कॉलेज में हुई हैं, लेकिन इसके लिए बनाई गई जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटी निष्क्रिय है। इस कमेटी को सक्रिय करने की जरूरत है।
-विपिन जोशी, डीएवी पीजी कॉलेज

हम भी करेंगे मदद
अगर किसी महिला को सामाजिक जीवन में किसी तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है तो हम उसकी मदद के लिए तैयार हैं। कभी भी हमसे संपर्क किया जा सकता है।
- मीनू, सिविल डिफेंस कार्यकर्ता

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