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Russia Ukraine War: उत्तराखंड पहुंचे यूक्रेन में फंसे चार छात्र, सीएम ने अधिकारियों को दिए सकुशल घर तक पहुंचाने के निर्देश
Wed, 02 Mar 2022 02:06 PM IST
रेनू सकलानी
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Wed, 02 Mar 2022 02:06 PM IST
सार
यूक्रेन में फंसे उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों के रहने वाले अन्य छात्रों की भी आज पहुंचने की उम्मीद है। चंपावत लोहाघाट के एक और मेडिकल के छात्र आदित्य दिल्ली पहुंचे गए हैं।
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उत्तराखंड पहुंचे छात्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूक्रेन में फंसे उत्तराखंड के चार छात्रों की घर वापसी हो गई है। छात्रों का अपर रेजिडेंट कमिश्नर अजय मिश्रा, मनोज जोशी असिस्टेंट प्रोटोकॉल द्वारा अगवानी की गई। यूक्रेन से अब तक उत्तराखंड के करीब 30 छात्र लौट चुके हैं। 28 छात्र दिल्ली एयरपोर्ट के जरिए देश लौटे, जिन्हें उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों ने एयरपोर्ट पर रिसीव किया।
वहीं कुछ छात्र मुंबई एयरपोर्ट के जरिए भी लौटे हैं, इससे पहले मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और विदेश से लौटे छात्रों से बात भी की। मुख्यमंत्री ने सभी छात्रों को सकुशल घर पहुंचाने के निर्देश भी दिए।
हॉस्टल के बंकर में रामनगर की एक छात्रा
देहरादून की ईशा रावत, हरिद्वार के मोहम्मद अनस, नैनीताल के शैली त्रिपाठी और पिथौरागढ़ की तनुश्री पांडेय यूक्रेन से उत्तराखंड पहुंच गए हैं। वहीं अभी रामनगर के दो विद्यार्थी भी यूक्रेन में फंसे हैं। हालात बिगड़ते देख कुछ छात्र बॉर्डर की ओर निकल पड़े है, जबकि रामनगर की एक छात्रा अभी भी हॉस्टल के बंकर में है।
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इधर, रामनगर दुर्गापुरी निवासी अधिवक्ता दीपक गौड़ की पुत्री सौम्या दीपक ने खारकीव से फोन पर बताया कि यूक्रेन में स्थिति बिगड़ गई है और कोई मदद नहीं कर रहा है। डर का माहौल है। खाने-पीने के सामान के दाम बढ़़ गए हैं। रूसी सैनिक बमबारी कर रहे हैं, जिस बंकर में सौम्या है। बकौल सौम्या जहां जिस बंकर में वह है, वहां 200 से अधिक छात्राएं हैं।
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वहीं कुछ छात्र मुंबई एयरपोर्ट के जरिए भी लौटे हैं, इससे पहले मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और विदेश से लौटे छात्रों से बात भी की। मुख्यमंत्री ने सभी छात्रों को सकुशल घर पहुंचाने के निर्देश भी दिए।
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हॉस्टल के बंकर में रामनगर की एक छात्रा
देहरादून की ईशा रावत, हरिद्वार के मोहम्मद अनस, नैनीताल के शैली त्रिपाठी और पिथौरागढ़ की तनुश्री पांडेय यूक्रेन से उत्तराखंड पहुंच गए हैं। वहीं अभी रामनगर के दो विद्यार्थी भी यूक्रेन में फंसे हैं। हालात बिगड़ते देख कुछ छात्र बॉर्डर की ओर निकल पड़े है, जबकि रामनगर की एक छात्रा अभी भी हॉस्टल के बंकर में है।
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ये भी पढ़ें...Ukraine Crisis : हर घंटे भारतीयों को यूक्रेन से निकाल रही हैं रोमानिया और पोलैंड की बसें
रामनगर के फ्रेंड्स गार्डन कॉलोनी निवासी डॉ. मोहम्मद शमी के छोटे पुत्र मोहम्मद कामरान एमबीबीएस करने के लिए 2015 से यूक्रेन में हैं। उसकी दो माह की पढ़ाई शेष बची थी। छात्र के पिता डॉ. शमी ने बताया कि बेटा निप्रो शहर में है और वहां हालात बिगड़े हैं। उनरा बेटा मदद की उम्मीद से साथियों के साथ बॉर्डर की ओर चल दिया है।इधर, रामनगर दुर्गापुरी निवासी अधिवक्ता दीपक गौड़ की पुत्री सौम्या दीपक ने खारकीव से फोन पर बताया कि यूक्रेन में स्थिति बिगड़ गई है और कोई मदद नहीं कर रहा है। डर का माहौल है। खाने-पीने के सामान के दाम बढ़़ गए हैं। रूसी सैनिक बमबारी कर रहे हैं, जिस बंकर में सौम्या है। बकौल सौम्या जहां जिस बंकर में वह है, वहां 200 से अधिक छात्राएं हैं।
बेटे के दिल्ली पहुंचने से माता-पिता ने ली राहत की सांस
यूक्रेन में फंसे चंपावत जिले के बाराकोट निवासी मेडिकल के छात्र आदित्य शर्मा मंगलवार रात सुरक्षित दिल्ली पहुंच गए। उन्होंने रूमानिया के पास के हवाई अड्डे से दिल्ली के लिए फ्लाइट पकड़ी। पिता नारायण दत्त कहते हैं कि बेटे के दिल्ली पहुंचने से वह सुकून महसूस कर रहे हैं।
आदित्य ने बताया कि हम वतन पहुंच तो गए, लेकिन उनका सफर कम जोखिमभरा नहीं रहा। वह बताते हैं कि उन्होंने पांच दिन पहले यूक्रेन एयर सर्विस से 28 फरवरी का भारत का टिकट बुक कराया था। इसके लिए 67 हजार रुपये चुकाए, लेकिन युद्ध तेज होने पर यूक्रेन की सभी एयर सर्विस रद्द हो गईं। इसके बाद वह पहले बस फिर 15 किमी पैदल चलकर रोमानिया पहुंचे। अपने साथियों के लिए चिंतित आदित्य ने बताया कि यूक्रेन में रह रहे अधिकतर छात्र-छात्राएं खौफ के साये में जी रहे हैं। वहां हालत बहुत खराब हैं।
ओसीन के लिए परिजनों से संपर्क करना हो रहा मुश्किल
यूक्रेन से मेडिकल की पढ़ाई करने वाली लोहाघाट की ओसीन अधिकारी दो दिन से रूमानिया में फंसी हैं। रविवार शाम किसी तरह रूमानिया पहुंचने के बाद भी उन्हें भारत के लिए फ्लाइट नहीं मिल पाई। मोबाइल का इंटरनेट खत्म होने के कारण परिजनों के लिए उनसे संपर्क करना मुश्किल हो रहा है। बेटी के जल्द भारत पहुंचने की उम्मीद के बीच मां किरन अधिकारी मंगलवार को दिल्ली रवाना हो गईं।
किरन बताती हैं कि बेटी दूसरे भारतीय छात्र-छात्राओं की मदद से परिवार तक संदेश पहुंचा रही है। वहीं बनबसा के व्यापारी किशोरी लाल गुप्ता की पुत्री सोनाली गुप्ता भी रूमानिया सीमा पहुंच गई। जबकि भजनपुर निवासी रोडवेज कर्मी संजीव कुमार का बेटा दिव्यांशु विश्वकर्मा अभी यूक्रेन में ही फंसा है।
आदित्य ने बताया कि हम वतन पहुंच तो गए, लेकिन उनका सफर कम जोखिमभरा नहीं रहा। वह बताते हैं कि उन्होंने पांच दिन पहले यूक्रेन एयर सर्विस से 28 फरवरी का भारत का टिकट बुक कराया था। इसके लिए 67 हजार रुपये चुकाए, लेकिन युद्ध तेज होने पर यूक्रेन की सभी एयर सर्विस रद्द हो गईं। इसके बाद वह पहले बस फिर 15 किमी पैदल चलकर रोमानिया पहुंचे। अपने साथियों के लिए चिंतित आदित्य ने बताया कि यूक्रेन में रह रहे अधिकतर छात्र-छात्राएं खौफ के साये में जी रहे हैं। वहां हालत बहुत खराब हैं।
ओसीन के लिए परिजनों से संपर्क करना हो रहा मुश्किल
यूक्रेन से मेडिकल की पढ़ाई करने वाली लोहाघाट की ओसीन अधिकारी दो दिन से रूमानिया में फंसी हैं। रविवार शाम किसी तरह रूमानिया पहुंचने के बाद भी उन्हें भारत के लिए फ्लाइट नहीं मिल पाई। मोबाइल का इंटरनेट खत्म होने के कारण परिजनों के लिए उनसे संपर्क करना मुश्किल हो रहा है। बेटी के जल्द भारत पहुंचने की उम्मीद के बीच मां किरन अधिकारी मंगलवार को दिल्ली रवाना हो गईं।
किरन बताती हैं कि बेटी दूसरे भारतीय छात्र-छात्राओं की मदद से परिवार तक संदेश पहुंचा रही है। वहीं बनबसा के व्यापारी किशोरी लाल गुप्ता की पुत्री सोनाली गुप्ता भी रूमानिया सीमा पहुंच गई। जबकि भजनपुर निवासी रोडवेज कर्मी संजीव कुमार का बेटा दिव्यांशु विश्वकर्मा अभी यूक्रेन में ही फंसा है।