सरकारी आवासों के आवंटन के नियमों में होगा बदलाव, अब निजी आवास होने पर नहीं मिलेगी यह सुविधा
सरकारी आवासों की कमी को देखते हुए आवास आवंटन के नियम बदले जा रहे हैं। जिन सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के अपने निजी आवास हैं तो उन्हें सरकारी आवास नहीं मिलेगा। केवल पदनाम के सापेक्ष नामित आवास (डेजिगनेटेड हाउस) में यह प्रावधान लागू नहीं होगा। इससे अपना निजी मकान किराये पर दे सरकारी आवास में जमे अफसरों कर्मचारियों का आवंटन निरस्त होगा।
सरकारी आवासों की बंदरबांट को दुरुस्त करने के लिए राज्य संपत्ति विभाग ने कमर कसी है। बड़ी संख्या में अफसर और कर्मचारी अपने आवास होने के बावजूद सरकारी आवासों में निवास कर रहे हैं। इससे आवास आवंटन की प्रक्रिया में प्रतीक्षारत अधिकारियों और कर्मचारियों को आवास नहीं मिल पा रहे हैं। इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आवास आवंटन नियमावली में बदलाव का प्रस्ताव राज्य संपत्ति विभाग ने तैयार किया है।
नामित आवास रहेंगे नियम से मुक्त
सरकार में कुछ चिन्हित पदों के लिए डेजिगनेटेड हाउस की सुविधा रहती है। यह सुविधा केवल मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जैसे अधिकारियों को है। ऐसे पदों पर तैनाती मिलने वाले अफसर का अगर निजी आवास भी है तो उसे सरकारी आवास मान्य होगा।
आवास आवंटन पर हाईकोर्ट सख्त
हाईकोर्ट ने 16 आईएएस और अन्य अधिकारियों कर्मचारियों के दोहरा आवंटन निरस्त करने का आदेश दिया है। इसके बाद विभाग ने तबादलों के बाद भी आवास नहीं छोड़ने वालों पर कार्रवाई की है। आवंटन निरस्त कर बाजार दर से किराया वसूली के नोटिस दिए गए हैं।
सरकारी आवास सीमित हैं। ऐसे में उनके तर्कसंगत आवंटन की प्रक्रिया बनाई जा रही है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के अपने आवास हैं, उन्हें सरकारी मकान नहीं मिलेगा। इसके लिए नियमावली में बदलाव किया जा रहा है।
ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव