Rudraprayag: कितने ट्रैकर आए कितने गए प्रशासन बेखबर, जिले में नहीं है पंजीकरण की कोई व्यवस्था
बीते तीन वर्षों में चोपता में ढाई लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे हैं लेकिन ट्रैकरों की कोई जानकारी नहीं है। ट्रैकरों व गाइडों का कहीं पंजीकरण नहीं हो रहा है जिससे न तो इनके आने का पता चल पता है और न ही वे किस रूट पर गए हैं इसकी जानकारी होती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पर्यटन और तीर्थाटन के प्रमुख केंद्र उत्तराखंड में उत्तरकाशी को छोड़कर अन्य किसी भी जिले में ट्रेकिंग और गाइड के लिए सिंगल विंडो सिस्टम नहीं है। ऐसे में ट्रैकर व गाइड का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है जिससे प्रशासन के पास ट्रैकरों को कोई डाटा नहीं होता है। ऐसे में यदि वे कभी किसी रूट में फंसते हैं तो प्रशासन को तत्काल इसकी सूचना नहीं मिल पाती है।
Kedarnath: महापंथ में सेना के दो हेलीकॉप्टर ने किया रेस्क्यू, 22 दिन बाद निकाला बर्फ में दबा हुआ ट्रैकर का शव
बीते तीन वर्षों में चोपता में ढाई लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे हैं लेकिन ट्रैकरों की कोई जानकारी नहीं है। ट्रैकरों व गाइडों का कहीं पंजीकरण नहीं हो रहा है जिससे न तो इनके आने का पता चल पता है और न ही वे किस रूट पर गए हैं इसकी जानकारी होती है। ट्रैकरों के पास अनुमति के नाम पर बस वन विभाग का पत्र होता है लेकिन वे किस रूट पर जा रहे हैं इसकी जानकारी नहीं होती है। फंसने की स्थिति में ही पुलिस व आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम को सूचना मिलती है।
पर्वतारोहण और पर्यटन से जुड़ी शिवानी गुसाईं का कहना है कि सिंगल विंडो सिस्टम होने से उत्तराखंड में आने वाले ट्रैकर और उनके साथ चलने वाले गाइड के बारे में विभाग व प्रशासन के पास पूरी जानकारी रहेगी। साथ ही किस रूट पर किस महीने कितने ट्रैकर पहुंच रहे हैं इसकी जानकारी भी रहेगी और सरकार को राजस्व भी मिलेगा। सिंगल विंडो सिस्टम से रेस्क्यू में भी मदद मिलेगी।
हिटो केदार अभियान भी नहीं चढ़ा परवान
2016 में हिटो केदार अभियान चलाया गया था। अभियान का मुख्य उद्देश्य केदारनाथ को अलग-अलग जगहों से जोड़ने वाले वैकल्पिक पैदल रास्तों के साथ ही जनपद के अन्य पुराने ट्रेकिंग रूटों को विकसित करना था लेकिन गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग के अलावा अन्य वैकल्पिक रास्तों की सुध नहीं ली गई। पूर्व विधायक मनोज रावत का कहना है कि ट्रेकिंग रूटों को सूचीबद्घ करने और स्थानीय स्तर पर ट्रेकिंग ऑपरेटर, गाइड का कार्य करने वालों का पंजीकरण कर उनके आधार कार्ड ऑनलाइन अपलोड करने के लिए पूर्व में शासन को पत्र भेजा गया लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अब ट्रेकिंग के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण की व्यवस्था की जा रही है। ट्रेकिंग से पूर्व अनुमति लेने के साथ ही जरूरी दस्तावेज रेंज या प्रभागीय कार्यालय को उपलब्ध कराने होंगे।
- इंद्र सिंह नेगी, डीएफओ, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग