स्कूल में नहीं था शिक्षक तो डीएम ने पत्नी को पढ़ाने के लिए भेजा
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किसी समस्या के तत्काल निस्तारण का तरीका कोई रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल से पूछे, जीजीआईसी रुद्रप्रयाग की हाईस्कूल कक्षाओं के विज्ञान वर्ग में टीचर के पद रिक्त होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने अपनी पत्नी को तब तक क्लास लेने की जिम्मेदारी सौंप दी, जब तक टीचर की नियुक्ति नहीं हो जाती।
उनकी पत्नी उषा घिल्डियाल ने यह जिम्मेदारी न केवल संभाल ली, बल्कि थोड़े से ही समय में छात्राओं की चहेती टीचर भी बन गईं हैं।
वर्ष 2011 में आईएएस की परीक्षा में देशभर में चौथा स्थान प्राप्त करने वाले रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने आईएफएस में जाने के बजाय होम कैडर क्यों चुना, इसका जवाब रुद्रप्रयाग में मिल रहा है। प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता के बावजूद जहां वे आमजन से जुड़ी समस्याओं का तत्परता से निस्तारण कर रहे हैं। वहीं, उनकी पत्नी उषा घिल्डियाल भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर जिले के विकास में साथ दे रही हैं।
पत्नी को विज्ञान पढ़ाने को कहा, तुरंत मान गई
दरअसल, करीब एक पखवाड़े पूर्व जीजीआईसी के निरीक्षण पर पहुंचे डीएम ने देखा कि विद्यालय में हाईस्कूल स्तर पर विज्ञान सहित कई पद रिक्त चल रहे हैं। इस पर, उन्होंने व्यवस्था होने तक अपनी पत्नी को बालिकाओं को विज्ञान विषय पढ़ाने का आग्रह किया, जिसे उन्होंने तुरंत स्वीकार कर लिया।
उषा घिल्डियाल बीते एक सप्ताह से नियमित विद्यालय पहुंचकर बालिकाओं को विज्ञान विषय की लिखित और प्रयोगात्मक पढ़ाई करवा रही हैं। छात्राओं में भी खासा उत्साह है। उषा घिल्डियाल ने गोविंद बल्लभ पंत विश्वविद्यालय, पंतनगर से प्लांट पैथोलॉजी से डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है।
स्कूली जीवन में भी वे जूनियर सहपाठियों और जरूरतमंद बच्चों को गणित, विज्ञान, अंग्रेजी आदि विषयों में समय देकर पारंगत बनाती रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके इस छोटे से प्रयास से बेटियों को लाभ मिल रहा है, इसमें उन्हीं भी खुशी मिलती है।
बकौल उषा, मैं चाहती हूं बेटियां शिक्षा, कला, विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ें और अपने क्षेत्र और जिले का नाम रोशन करें। विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. ममता नौटियाल ने कहा कि उषा घिल्डियाल नई मिसाल पेश कर रही हैं। सौम्य व्यवहार के साथ-साथ उनके पढ़ाने का तरीका उनको सबका चहेता बना रहा है। अभिभावक-शिक्षक संघ के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश सेमवाल का कहना है इससे बड़े सौभाग्य की बात क्या हो सकती है, डीएम की पत्नी निस्वार्थ भाव से हमारी बेटियों को पढ़ा रही हैं। इससे बेटियों को भी नई सीख मिलेगी, साथ ही अन्य लोग भी प्रेरित होंगे।