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रूबी कांडः फर्जी आईएस बनना नामुमकिन
अजित सिंह राठी / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 21 Apr 2015 11:30 AM IST
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आईएएस अफसरों को प्रशिक्षण देने वाली लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी आजकल रूबी चौधरी प्रकरण से सुर्खियों में है।
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पुलिस की अभी तक की जांच में ऐसे तथ्य मिले हैं जिससे कहा जा रहा है कि रूबी चौधरी ट्रेनिंग लेकर आईएएस बन जाती। लेकिन कैसे, यह जवाब किसी के पास नहीं है? देश की इस सर्वोच्च सेवा में आने की प्रक्रिया इतनी जटिल और पारदर्शी है कि हर कदम पर सत्यापन के बहुतेरे चेक बैरियर हैं। इसलिए किसी भी स्तर से फर्जी आईएएस बनना नामुमकिन है।
हर अभ्यर्थी की विस्तृत तफ्तीश के बाद ही यूपीएससी उसका चयन करती है। आयोग उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की सूची जारी करता है, तो डीओपीटी (केंद्रीय कार्मिक विभाग) का काम शुरू होता है। हर अभ्यर्थी से जुड़ी पूरी फाइल संघ लोक सेवा आयोग के साथ ही डीओपीटी, एलबीएस अकादमी और संबंधित राज्य सरकारों के पास होती है।
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आयोग जिनका चयन करता है डीओपीटी उन्हें एलबीएस भेजता है। डीओपीटी ही बैच अलाट करता है, ट्रेनिंग के दौरान ही अफसर अपने राज्य में जाते हैं। यानी जिनके पास डीओपीटी का नियुक्ति पत्र नहीं है वह एलबीएस अकादमी में प्रशिक्षण के लिए प्रवेश ही नहीं कर सकता।
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संघ लोक सेवा आयोग का कार्य
आवेदन के साथ सभी प्रमाणित कागजात संलग्न करने होते हैं। प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के लिए अलग-अलग एडमिट कार्ड जारी होते हैं। हर परीक्षा का परिणाम आयोग की वेबसाइट पर अपलोड होता है।
साक्षात्कार से पहले तमाम प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया जाता है। साक्षात्कार में पास अभ्यर्थियों की सूची जारी कर हर अभ्यर्थी की मुकम्मल फाइल डीओपीटी को भेजी जाती है। जिसके आधार पर डीओपीटी अपनी कार्रवाई करता है।
यह है डीओपीटी का कार्य
चयनित अभ्यर्थियों की पुलिस जांच एवं तहसील से प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराकर डीओपीटी नियुक्ति पत्र भेजकर एलबीएस अकादमी में रिपोर्ट करने को कहता है। इससे पहले ही हर अभ्यर्थी का पूरा रिकॉर्ड अकादमी को भेजा जाता है।
अकादमी में प्रवेश के लिए डीओपीटी के नियुक्ति पत्र का अभ्यर्थी के रिकॉर्ड से मिलान होता है। इसी बीच डीओपीटी हर अफसर को एक कोड नंबर जारी करता है, जो हमेशा के लिए होता है और जिसे अकादमी को भी भेजा जाता है।
ऐसे शुरू होता है एलबीएस में प्रशिक्षण
प्रशिक्षण शुरू होते ही डीओपीटी चयनित अभ्यर्थियों के बैच आवंटित करता है। करीब तीन महीने बाद ट्रेनी आईएएस भारत दर्शन पर जाकर रिपोर्ट तैयार कर अकादमी में जमा करते हैं। यह फेस-1 की ट्रेनिंग होती है। इसके बाद आईएएस प्रोबेशनर के रूप में अपने-अपने कैडर में जिला प्रशिक्षण के लिए जाते हैं।
इसी दौरान डीओपीटी हर अफसर की फाइल आवंटित कर राज्य को भेजता है। इसी दौरान प्रोबेशनर्स को संबंधित राज्य कर्मचारी कोड देता है, जिससे वेतन की व्यवस्था होती है। यह कोड डीओपीटी के रिकॉर्ड मिलने पर मिलता है। एक वर्ष बाद पुन: फेस-2 की ट्रेनिंग के लिए आईएएस अकादमी जाते हैं और इसके बाद पूर्णकालिक नियुक्ति हो जाती है।
फर्जी तरीके से आईएएस बनने का प्रयास ही निरर्थक है। अखिल भारतीय सेवाओं में फर्जीवाड़े से चयन नहीं हो सकता। मैं आईएएस सलेक्ट हुआ तो पुलिस जांच रिपोर्ट में विलंब होने से मेरी ट्रेनिंग पूरे बैच से 11 दिन बाद शुरू हुई। हर कदम पर इतने सत्यापन हैं कि यह संभव ही नहीं है। आईएएस बनाने का काम एलबीएस का नहीं, बल्कि यूपीएससी का है। कोई धोखे से एलबीएस में प्रशिक्षण ले भी ले तो भी आईएएस नहीं बन सकता और न ही कहीं नियुक्ति पा सकता है।
- एसके मट्टू, पूर्व अपर मुख्य सचिव