...इसलिए टम्टा को नहीं मिली मोदी कैबिनेट में एंट्री
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अजय टम्टा की मंत्रिमंडल में होते-होते रह गई एंट्री पहेली बनकर रह गई। कम ही लोगों को इस बात की खबर है कि तय होने के बाद टम्टा को मंत्रिमंडल में न लिए जाने की असली वजह क्या रही?
बताया जा रहा है कि संघ के कुछ बड़े नेता इस बात से नाखुश थे कि राज्य में तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को किनारे कर एक अपेक्षाकृत कम अनुभवी नेता को केंद्र में मंत्री बनाया जाए। विस्तार के दिन तक यह बात केंद्रीय नेतृत्व ने भी समझ ली।
इसके अलावा, सूत्रों के मुताबिक बाबा रामदेव की ओर से रमेश पोखरियाल निशंक की जोरदार वकालत की गई। उधर, संघ के कुछ बड़े नेता भगत सिंह कोश्यारी के पक्ष में आ गए। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता भी भगतदा के हिमायती बने। आखिर में समीकरण दुर्गम हो गए। इसी जद्दोजहद में उत्तराखंड मंत्रिमंडल में जगह पाने से वंचित रह गया।
इंतजार करते रहे टम्टा, नहीं आया बुलावा
अल्मोड़ा के सांसद अजय टम्टा शनिवार को दिल्ली पहुंच गए थे। वह रविवार को दिल्ली में अपने आवास पर पीएमओ से संदेश मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें नहीं बुलाया गया।
अजय को राज्यमंत्री बनाए जाने के संकेत मिले थे। बाद में टम्टा ने कहा कि उन्हें शपथ लेने के संबंध में दिल्ली से कोई सूचना नहीं मिली थी और वह फरीदाबाद में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। कहा कि इस बार भी मंत्रिमंडल में उत्तराखंड को स्थान नहीं मिला।
यह था मजबूत पक्ष
खबरें थी कि उत्तराखंड के सांसदों में सबसे युवा होने के साथ ही बेदाग छवि और अनुसूचित जाति वर्ग से होने का लाभ उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल होकर मिलेगा। राज्य से सांसद बने तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की आपसी फूट से उनका नाम उछला।