रुड़की: नारसन बॉर्डर से पुरकाजी तक वाहनों की कतार, बिना निगेटिव जांच रिपोर्ट वालों को लौटाया
कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम हुआ तो लोगों ने उत्तराखंड की वादियों में घूमने का मन बना लिया है। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से लोग परिवार के साथ घूमने आ रहे हैं।
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बारिश और कोरोना संक्रमण के बावजूद वीकेंड पर बाहरी राज्यों से आने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। रविवार को छुट्टी के चलते बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की नारसन बॉर्डर पर भारी भीड़ उमड़ी। आलम यह था कि दोपहर में बॉर्डर से यूपी के पुरकाजी तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस ने सख्ती करते हुए बिना कोरोना जांच रिपोर्ट और जांच के किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया।
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कोरोना संक्रमण के चलते प्रदेश के सभी बॉर्डर पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 72 घंटे पहले की निगेटिव रिपोर्ट के बिना किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
इन सबके बावजूद रविवार को नारसन बॉर्डर पर बाहरी राज्यों के लोगों की भारी भीड़ जुट गई। सुबह पांच बजे से ही बड़ी संख्या में लोग बॉर्डर पर पहुंचने लगे थे। भीड़ को देखते हुए बॉर्डर पर सख्ती बढ़ा दी गई। दोपहर को इतनी भीड़ जुटी कि पुरकाजी तक वाहनों की लाइन लग गई और जाम के हालात बन गए। ऐसे में पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। बिना निगेटिव रिपोर्ट लेकर पहुंचे लोगों को लौटा दिया गया। वहीं, कोरोना जांच विंडो पर लोगों की लंबी कतार लगी रही। नारसन बॉर्डर के प्रभारी सुभाष शर्मा ने बताया कि बिना जांच और निगेटिव जांच रिपोर्ट के किसी को भी प्रवेश नहीं होने दिया जा रहा है। बॉर्डर पर सख्ती से जांच की जा रही है।
बॉर्डर पर ऐसे हालात, कांवड़ यात्रा को अनुमति मिली तो कैसे कर पाएंगे जांच
कोविड गाइडलाइन का पालन कराते हुए सावन की कांवड़ यात्रा को अनुमति दिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह संभव है। रविवार को नारसन बॉर्डर पर बाहरी यात्रियों के लिए की गई कोरोना जांच व्यवस्था से तो यही लगता है कि कांवड़ सीजन में उमड़ने वाली भीड़ में सभी की जांच लगभग नामुमकिन है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच संक्रमण फैलने का खतरा बना रहेगा।
कोरोना संक्रमण कम होने पर बड़ी संख्या में सैलानी नारसन बॉर्डर होकर उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। रविवार को यहां 4500 रजिस्ट्रेशन किए गए। यानी, सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इतने ही लोगों को सीमा में प्रवेश दिया गया, लेकिन इनमें से कितनों की पुख्ता जांच हुई है, इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि रविवार को बॉर्डर पर महज 940 लोगों की कोरोना जांच की गई जबकि 500 यात्री कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट साथ लेकर आए थे। इसके अलावा कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट नहीं होने के चलते 300 वाहनों को बॉर्डर से लौटा दिया गया। ऐसे में बॉर्डर से प्रवेश पाने वाले 1440 लोगों की सही ढंग से जांच हो पाई। इस संबंध में बॉर्डर पर तैनात कर्मचारियों का कहना है कि बॉर्डर पर यात्रियों की रैंडम कोरोना जांच की जा रही है। सीमित संसाधनों के तहत काम किया जा रहा है। रैंडम जांच के तहत कार में बैठे लोगों में से एक की जांच की जाती है। उसकी रिपोर्ट नेेगेटिव आने पर सभी को प्रवेश दे दिया जा रहा है।
ऐसे में बॉर्डर पर नियमों का तो पालन हो रहा है, लेकिन यह तय कर पाना संभव नहीं है कि किसी एक वाहन में बैठे सभी लोगों में कौन संक्रमित होगा। ऐसे में यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं की सीमित संख्या में ही जब सभी लोगों की जांच संभव नहीं हो पा रही है तो कांवड़ यात्रा में उमड़ने वाली लाखों लोगों की भीड़ में सभी की जांच मुमकिन नहीं लग रहा। दूसरी ओर, नारसन बॉर्डर के प्रभारी सुभाष शर्मा ने बताया कि भविष्य में कोरोना जांच बढ़ाने को लेकर जो भी निर्देश उच्चाधिकारियों की ओर से प्राप्त होंगे, उसके अनुसार व्यवस्था सुचारु की जाएगी।
ये रहे हालात
रजिस्ट्रेशन : 4500
कोरोना जांच : 940
रिपोर्ट लेकर आए : 500
वाहन लौटाए : 300