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रुड़की : थानों, कोतवाली में गुम हो रही फरियादियों की आवाज, पुलिस के सुनवाई न करने पर अदालत की शरण ले रहे लोग 

Thu, 10 Dec 2020 12:47 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal मोनू शर्मा, अमर उजाला, रुड़की
मोनू शर्मा, अमर उजाला, रुड़की Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 10 Dec 2020 12:47 PM IST
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Roorkee news : complainants voice Missing in police stations
प्रतीकात्मक तस्वीर
‘माई लॉर्ड! मैंने थाने जाकर पुलिस को तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पिछले चार महीने से केस दर्ज करवाने के लिए भटक रही हूं, लेकिन पुलिस ने नहीं सुनी तो कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।’
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जी हां! थानों और कोतवाली में सुनवाई नहीं होने पर फरियादी कोर्ट को इसी तरह प्रार्थनापत्र देकर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। कोर्ट भी ऐसे प्रार्थना पत्रों पर संज्ञान लेकर पुलिस को केस दर्ज करने के आदेश दे रही है। इसके बाद फरियादी को इंसाफ मिल रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पुलिस सीधे केस दर्ज क्यों नहीं कर रही है।
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केस नंबर एक
लक्सर कस्बे के शिवपुरी मोहल्ला निवासी मीनाक्षी ने 27 अगस्त को ससुरालियों पर मारपीट का आरोप लगाकर पुलिस को तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने चार महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर पीड़िता ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने उनके पति समेत ससुरालियों के खिलाफ अब केस दर्ज कर लिया है। 
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केस नंबर दो 

गंगनहर कोतवाली क्षेत्र के कृष्णानगर निवासी राजीव कुमार वकील हैं। 23 सितंबर 2019 को उनके निर्माणाधीन मकान में कुछ युवक घुस आए थे। उन्होंने एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। साथ ही तहरीर दी थी। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। दो महीने बाद कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज किया।

केस नंबर तीन 

लक्सर की रायसी चौकी के महाराजपुर कलां गांव में दो अगस्त को दो परिवारों के बीच मारपीट हुई थी। इसमें एक के पक्ष राजेश कुमार ने पुलिस को तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। पुलिस चार महीने तक उसे घुमाती रही। इसके बाद पीड़ित ने कोर्ट की शरण ली तो चार महीने बाद चार नवंबर को केस दर्ज किया गया।  

एक ओर नए डीजीपी खुद ही पुलिस की मॉनिटरिंग कर रहे हैं तो वहीं थानों और कोतवाली में फरियादियों की आवाज गुम हो रही है। डीजीपी अशोक कुमार ने पुलिस को कोतवाली और थाने पहुंचने वाले लोगों की फरियाद सुनकर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन शायद ही जिले में इनका सही से पालन हो रहा है। दरअसल, पुलिस कोतवाली और थानों में आने वाले कई मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही है।

पुलिस जांच कर केस दर्ज करने के लिए फरियादियों को एक साल से छह महीने तक चक्कर लगवाती है। ऐसे में फरियादी पुलिस से इंसाफ की उम्मीद छोड़कर कोर्ट की शरण में जा रहे हैं। कोर्ट में फरियादी प्रार्थनापत्र देकर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। रुड़की और देहात में पिछले दो महीने में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। बाद में कोर्ट के आदेश पर आखिर पुलिस को केस दर्ज करना पड़ा।


कई मामले ऐसे होते हैं, जिनकी जांच में समय लगता है। इस बीच फरियादी कोर्ट में प्रार्थनापत्र डाल देता है। कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज करना पड़ता है। पुलिस को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हर किसी की फरियाद पर कार्रवाई होगी।
-एसके सिंह, एसपी देहात
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