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हादसों से निपटने का प्लान: उत्तराखंड में हर साल सैकड़ों गंवाते हैं जान, अब हर जिले में गठित होगी सड़क सुरक्षा समिति

Tue, 05 Apr 2022 10:36 AM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Tue, 05 Apr 2022 10:36 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अलावा केंद्र व राज्य के परिवहन मंत्रालयों की ओर से जारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करेगी। सड़क हादसों में शामिल वाहन की पूरी डिटेल, उस हादसे की वजह, मौका मुआयना और जरूरी सबूत, प्रभावितों की पूरी जानकारी को समाहित करते हुए रिपोर्ट तैयार करेगी।

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Road safety committee will be formed in districts to prevent road accidents
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

सड़क हादसों को नियंत्रित करने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा समिति ने जिलावार समितियों के गठन के निर्देश दिए हैं। इसके तहत उत्तराखंड में भी अब हर जिले में डीएम की अध्यक्षता में समिति का गठन होगा। उत्तराखंड सड़क सुरक्षा के नोडल अधिकारी सुधांशु गर्ग ने बताया कि जिलों की समिति डीएम की अध्यक्षता में बनेगी।

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इसमें एसपी, सीएमओ, पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन, मंत्रालय के प्रतिनिधि, एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, निगम-पालिका के ईई, किसी सामाजिक संस्था के प्रतिनिधि बतौर सदस्य शामिल होंगे। स्टेट हाईवेज के अधिकारी इसमें सदस्य सचिव होंगे। यह समिति लगातार हादसों की समीक्षा करेगी। सड़क सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की निगरानी भी करेगी।
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सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अलावा केंद्र व राज्य के परिवहन मंत्रालयों की ओर से जारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करेगी। सड़क हादसों में शामिल वाहन की पूरी डिटेल, उस हादसे की वजह, मौका मुआयना और जरूरी सबूत, प्रभावितों की पूरी जानकारी को समाहित करते हुए रिपोर्ट तैयार करेगी।
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जहां जरूरी होगा, यह समिति ही एफआईआर दर्ज कराएगी। यह समिति हर महीने सड़क हादसों की जानकारी सार्वजनिक करेगी। समिति हर जिले में सड़क सुरक्षा प्लान बनाएगी। बस या अधिक यात्रियों से जुड़े हादसे की फॉरेंसिक जांच भी यह समिति कराएगी। घटनास्थल तक एंबुलेंस आदि की सुविधा मिले यह भी सुनिश्चित करेगी। 

बड़े हादसों से निपटने को यह प्लान

जिलों की सड़क सुरक्षा समिति की यह जिम्मेदारी होगी कि वह अपने जिले में बड़े हादसे होने की स्थिति के लिए इमरजेंसी मेडिकल प्लान तैयार रखे। हादसे होने पर एंबुलेंस और अस्पतालों के बीच आपसी तालमेल बनाए। यह भी सुनिश्चित करेगी कि हादसे होने पर अलग-अलग तरह की एंबुलेंस उपलब्ध हो। महीने में से कम से कम एक बार इस जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक होगी।

प्रदेश में हर साल सड़क हादसों में सैकड़ों लोग अपनी जान गंवाते हैं। पिछले तीन माह में ही कई ऐसे बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें बस या पिकअप खाई में गिरने से बड़ी संख्या में जनहानि हुई है। हाल ही में 22 फरवरी को टनकपुर चंपावत हाईवे पर हुए हादसे में 14 की मौत हुई। इसी दिन, पौड़ी में शिक्षकों की कार खाई में गिरने से तीन शिक्षकों की मौत हो गई।

21 मार्च को उत्तरकाशी में ट्रक खाई में गिरने से दो की मौत हुई, चार घायल हुए और पांच लापता हो गए। इससे पहले 31 अक्तूबर को चकराता में बड़ा सड़क हादसा हुआ था, जिसमें 11 की मौत हो गई थी। इतने हादसों के बीच निश्चित तौर जिला सड़क सुरक्षा समिति एक नई उम्मीद जगाएगी।

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