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'खूनी' सड़क के कारण बुजुर्ग घरों में कैद
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 06 Jan 2015 03:55 PM IST
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एक साल से देहरादून के टर्नर रोड पर ड्रेनेज पाइप लाइन का काम पूरा नहीं हो पाया है।
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दोपहिया वाहन चालक हो रहे जख्मी
ऐसे में गुजरने वाले दर्जनों गांव के हजारों लोगों का जीना दूभर हो गया है। खुदाई के बाद जस की तस छोड़ी गई सड़क खूनी बनती जा रही है। बारिश में रपट कर दोपहिया वाहन चालक जख्मी हो रहे हैं तो दुकानों में ग्राहकों का टोटा हो गया है।
बुजुर्ग घरों में कैद हो गए हैं तो बच्चों का खेलकूद छह माह से बंद है। नरक जैसे हालात से जूझ रहे लोगों के लिए सरकारी अमले का दिल पसीजता ही नहीं।
टर्नर रोड के दोनों ओर करीब बीस हजार आबादी बसती है। इसी सड़क से भोरोवाला, बारूवाला, चानचक, आशारोड़ी गांव, तिब्बत कालोनी, सैन्य क्षेत्र और छावनी क्लेमेंटटाउन का रास्ता गुजरता है। यहां से गुजरने वाले तमाम गांवों का बाजार भी टर्नर रोड पर था। मगर सभी ने अपने रास्ते बदल लिए हैं।
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व्यापार मंडल अध्यक्ष अखिल भाटिया के मुताबिक व्यापारियों के खाने के लाले पड़ गए हैं। आजीविका चलाना इतना कठिन हो गया है कि कई व्यापारियों ने धंधा ही बदल दिया। बीस से ज्यादा बार एमडीडीए उपाध्यक्ष से मिल आए, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला।
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क्लेमेंटटाउन रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी उपाध्यक्ष महेश पांडे ने कहा कि स्थानीय लोग हर वक्त डरे रहते हैं कि कहीं कोई बच्चा या बुजुर्ग खुदी सड़क पर हादसे का शिकार न बन जाए। सड़क से गुजरना है कि कपड़े कीचड़ से सनने तय हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत वैसे तो पूरे शहर का दौरा कर रहे हैं, लेकिन टर्नर रोड की तरफ उन्होनें ने भी नजरें फेर रखी हैं।
घरों में कैद होकर रह गए सीनियर सिटीजन
रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी अध्यक्ष कर्नल सुरेश त्यागी बताते हैं कि सीनियर सिटीजन घरों में कैद होकर रह गए हैं। तीन माह में कई बुजुर्ग सड़क पर फिसल कर चोटिल हो गए। कर्नल त्यागी ने बताया एमडीडीए के समक्ष कई बार प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया। लेकिन लगता है कि हम भारतीय नहीं, विदेशी शरणार्थी हैं।
टर्नर रोड निवासी विनोद गुप्ता दस दिन पहले बेटे को स्कूल से लाने घर से निकले ही थे कि कीचड़ से सनी सड़क पर स्कूटर फिसल गया। हादसे में बाएं हाथ की हड्डी टूट गई। वहीं पार्थ जैन इसी सड़क पर हादसे का शिकार बन अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। इनके अलावा बीते चार माह में 13 से अधिक लोग टर्नर रोड पर बदहाल सड़क पर सिस्टम की लापरवाही से हाथ-पैर तुड़वा चुके हैं।
अंकित गोयल की मिठाई की दुकान में कभी पूरे दिन ग्राहकों की भीड़ रहती थी। धंधा इतना बढ़ चुका था कि मदद के लिए पांच कर्मचारी भी रख लिए थे। मगर अब दिन में इक्का दुक्का ग्राहक ही दुकान का रुख करते हैं। कर्मचारी भी केवल एक रह गया है। बताते हैं, जब धंधा ही मंदा हो गया तो कर्मचारियों को कहां से तनख्वाह देते।
स्थानीय निवासी गोविंद शर्मा के मुताबिक एक साल से उनके घर कोई रिश्तेदार नहीं आया। त्योहारों में किसी को बुलाओं भी तो वह साफ मना कर देते हैं। एक साल से दिवाली और होली रिश्तेदारों के घर जाकर मनाई। अपना हाल देखकर रोना आता है। बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है, बाजार जाने के लिए दस बार सोचना पड़ता है।
रोड की मरम्मत के लिए टेंडर हो चुके हैं। एक कंपनी को काम भी मिल चुका है। जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी। कंपनी को सख्त निर्देश दिए गए हैं वो जल्द काम पूरा करे।
- एमडीडीए सचिव, बंशीधर तिवारी